विदेशी मरीजों के लिए भारत की नई तैयारी, ‘सस्ते इलाज’ की जगह अब इन शानदार सुविधाओं पर रहेगा… – TV9 Bharatvarsh

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भारत हमेशा से दुनियाभर के लोगों के लिए बेहतर इलाज का एक बड़ा केंद्र रहा है. हर साल लाखों विदेशी नागरिक अपनी बीमारियों का इलाज कराने हमारे देश आते हैं. इसे मेडिकल टूरिज्म कहा जाता है. जब विदेशी मरीज यहां आते हैं, तो देश में विदेशी मुद्रा आती है और रोजगार के कई नए अवसर पैदा होते हैं. हाल के समय में दुनिया भर में चल रही कूटनीतिक हलचलों के बीच, भारत में आने वाले मरीजों की संख्या में कुछ बदलाव देखने को मिले हैं. इसे देखते हुए अब देश के अस्पताल और सरकार अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव कर रहे हैं. भारत अब सिर्फ ‘सस्ते इलाज’ के बजाय, अपनी हाई-टेक सुविधाओं के दम पर दुनिया भर के मरीजों को बेहतरीन सेवाएं देने की तैयारी में है.
महामारी से पहले यानी साल 2019 में रिकॉर्ड 6,97,453 विदेशी नागरिक इलाज के लिए भारत आए थे. वहीं, इमिग्रेशन ब्यूरो के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से नवंबर 2025 के बीच 4,50,633 मेडिकल टूरिस्ट भारत पहुंचे हैं. आंकड़ों में यह बदलाव अचानक नहीं आया है. पश्चिमी एशिया समेत दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे तनाव और यात्रा में आ रही रुकावटों की वजह से विदेशी मरीजों की संख्या में यह अंतर देखने को मिला है. हालांकि, देश की हेल्थकेयर इंडस्ट्री इसे एक अस्थायी बदलाव के रूप में देख रही है और भविष्य के लिए बड़े स्तर पर नई योजनाएं बना रही है.
भारत के अस्पतालों में सबसे ज्यादा मरीज हमेशा से पड़ोसी देश बांग्लादेश से आते रहे हैं. साल 2024 में वहां हुए बड़े राजनीतिक बदलावों के कारण दोनों देशों के बीच आवाजाही प्रभावित हुई है. साल 2024 में जहां 17.5 लाख से ज्यादा बांग्लादेशी भारत आए थे, वहीं 2025 में नवंबर तक यह संख्या करीब 4.66 लाख रही है. एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया के महानिदेशक गिरधर ज्ञानी का कहना है कि वीजा मिलने में होने वाली देरी और कूटनीतिक बदलावों का सीधा असर मरीजों की संख्या पर पड़ा है. हालांकि, हालात सामान्य होने के साथ ही इसके फिर से पटरी पर लौटने की पूरी उम्मीद है.
आज के समय में थाईलैंड, सिंगापुर और मलेशिया जैसे देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन मेडिकल सुविधाएं दे रहे हैं. ऐसे में भारत को अब इनसे कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है. हेल्थकेयर विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी रणनीति बदलनी होगी. अब हमें खुद को महज एक ‘सस्ते इलाज वाले देश’ के रूप में पेश करने से बचना होगा. इसके बजाय, अस्पतालों का पूरा ध्यान अब अत्याधुनिक तकनीक, बहुत तेज और पूरी तरह से भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं देने पर है. यह बदलाव भारत को ग्लोबल स्तर पर एक प्रीमियम और भरोसेमंद हेल्थकेयर ब्रांड बनाएगा.
इन सभी बदलावों के बीच, देश के बड़े अस्पतालों को भविष्य से काफी सकारात्मक उम्मीदें हैं. अपोलो हॉस्पिटल्स की प्रबंध निदेशक सुनीता रेड्डी मानती हैं कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का यह असर बहुत कम समय के लिए है. उनका अनुमान है कि आने वाले समय में श्रीलंका, इंडोनेशिया और सीआईएस (CIS) देशों से भारत में इलाज के लिए आने वालों की मांग तेजी से बढ़ेगी. खास तौर पर कैंसर, हार्ट और न्यूरो जैसी जटिल बीमारियों के इलाज में भारत सबसे आगे रहेगा. इसी तरह, मैक्स हेल्थकेयर के चेयरमैन अभय सोई का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे बदलाव भारत के लिए नए मौके लेकर आ रहे हैं. अगर वीजा जैसी जरूरी व्यवस्थाओं को और अधिक आसान बना दिया जाए, तो भारत का मेडिकल टूरिज्म सेक्टर एक बार फिर अपनी पूरी ताकत के साथ नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है.
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