ग्राउंड रिपोर्ट: 'सप्लीमेंट्री लिस्ट से नाम गायब, कैसे दूं वोट…' बंगाल में ट्रिब्यूनल के चक्कर लगा रहे लोगों का दर्द – AajTak

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पश्चिम बंगाल में वोटिंग की तारीख नजदीक आते ही वहां का सियासी पारा हाई है. पहले फेज में 23 अप्रैल को 152 और दूसरे फेज में 29 अप्रैल को 142 विधानसभा सीटों पर वोटिंग है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई भी पात्र मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित ना रहें. इसके बावजूद एसआईआर विवाद से वोटरों की मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं.
उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद चुनाव आयोग ने 19 अपील ट्रिब्यूनल बनाए हैं. इन जगहों पर वोटर SIR को लेकर अपील या अपनी आपत्ति दर्ज कर सकते हैं. बंगाल में सियासी जंग के बीच आज तक ने उन लोगों से बात की, जो ट्रिब्यूनल पहुंचे और अपनी परेशानियों को साझा किया.
कई मतदाता जो कई किलोमीटर दूर से ट्रिब्यूनल पहुंचे, उन्होंने बताया कि उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई. सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें वापस लौटा दिया. कई लोगों को अब भी समझ नहीं आ रहा है कि सुनवाई की प्रक्रिया क्या है? क्या उनके मामलों की व्यक्तिगत रूप से सुनवाई होगी?
ट्रिब्यूनल के बाहर मौजूद मतदाताओं ने कहा कि उन्हें पता नहीं है कि कहां जाना है या सुनवाई कब होगी? उनका नाम मतदाता सूची में कैसे वापस जोड़ा जाएगा?
मिदनापुर की 50 वर्षीय अल्पना मन्ना के बेटे अभिजीत ने बताया कि उनकी मां बेहाला वेस्ट की वोटर हैं. साल 2002 से मां के पास वोटर कार्ड है. मेरे पिता और मेरा नाम वोटर लिस्ट में है. अब मेरी मां का नाम आखिरी समय में सप्लीमेंट्री लिस्ट से हटा दिया गया. 7 अप्रैल को BLO ने फोन करके इस बारे में जानकारी दी. स्थानीय नेता से जब इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा ट्रिब्यूनल जाओ.
अभिजीत ने कहा, ‘मैंने BLO को फोन किया, तो उन्होंने कहा कि टीएमसी दफ्तर जाओ और ऑनलाइन फॉर्म भरो. मैं प्रिंटआउट और दस्तावेज लेकर आया हूं. अगर काम हो जाए तो देखते हैं क्या होता है’.
दूसरा केस भी कुछ ऐसा ही है. मध्यमग्राम के निवासी 57 वर्षीय राहुल सभरवाल एक प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं. उन्होंने बताया कि उनका और उनकी पत्नी का नाम लिस्ट में है, लेकिन उनके 27 वर्षीय बेटे आयुष का नाम सप्लीमेंट्री लिस्ट से हटा दिया गया. यह स्पष्ट नहीं है कि पश्चिम बंगाल में जन्मे और पले-बढ़े आयुष का नाम अचानक क्यों हटा दिया गया.
राहुल 14 अप्रैल को ट्रिब्यूनल गए थे और गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मी से बात की. लेकिन उसने हमें बाद में आने को कहा. इसके बाद कुछ नहीं हुआ. स्पष्टता की कमी के कारण ट्रिब्यूनल के माध्यम से राहत पाने की कोशिश कर रहे लोगों में काफी नाराज़गी है.
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, जिन हटाए गए मतदाताओं के मामलों का निपटारा 21 अप्रैल तक हो जाएगा, वे 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के चुनाव में मतदान कर सकेंगे. दूसरे चरण के लिए मामले के निपटारा करने की डेट 27 अप्रैल है. दूसरे फेज का मतदान 29 अप्रैल को है. 4 मई को नतीजे आएंगे.
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