Explained: अमेरिका ने किस के डर से छोड़ा सीरिया? ट्रंप ने कसराक बेस से सैनिक क्यों हटाए, – ABP News

अप्रैल 2026 में अमेरिका ने सीरिया से अपनी पूरी सैन्य मौजूदगी खत्म कर दी. हसाका प्रांत के कसराक एयरबेस से आखिरी अमेरिकी काफिला निकल गया. इसके साथ ही हसाका, रुमैलान, देइर एज-जोर समेत कम से कम सात बड़े ठिकाने सीरियाई सरकार को सौंप दिए गए. अब इन सभी बेसों पर सीरियाई सेना का पूरा कंट्रोल है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की कि करीब 2000 अमेरिकी सैनिक जॉर्डन लौट रहे हैं. लेकिन ऐसा क्या हुआ जो ट्रंप ने यह फैसला लिया? जानेंगे एक्सप्लेनर में…
सवाल 1: अमेरिकी सेना ने सीरिया छोड़ने में किसके डर का सबसे बड़ा रोल था?
जवाब: सबसे बड़ा डर तुर्किये और ईरान समर्थित मिलिशिया से था. तुर्किये SDF को PKK आतंकवादी संगठन का हिस्सा मानता है और अमेरिका की मौजूदगी में खुलकर हमला नहीं कर पा रहा था. अमेरिकी सैनिकों के जाते ही SDF कमजोर हो गया, जिससे उसे दमिश्क सरकार से समझौता करना पड़ा. साथ ही, ईरान समर्थित गुटों से हमले का खतरा भी था. अमेरिकी सैनिक और सामान जॉर्डन रूट से निकाला गया ताकि इराक होते हुए ईरानी प्रॉक्सी हमले से बचा जा सके.
ट्रंप प्रशासन ने फरवरी 2026 में ही पूरा प्लान बनाया था. सीरिया की नई सरकार ने भी कहा कि अब पूरे देश पर एक ही प्रशासन चलेगा और सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह उसके पास है. अमेरिका के लिए अब सीरिया में रहना महंगा और जोखिम भरा हो गया था. यह फैसला 2014 में ISIS के खिलाफ अभियान शुरू होने के ठीक 12 साल बाद लिया गया. तब अमेरिका ने कुर्द-नेतृत्व वाले सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस (SDF) के साथ मिलकर ISIS को हराया था, लेकिन दिसंबर 2024 में बशर अल-असद की सत्ता गिरने और नए राष्ट्रपति अहमद अल-शारा के आने के बाद हालात बदल गए.
अमेरिका ने SDF और दमिश्क सरकार के बीच समझौता करवाया, जिसके तहत SDF अब सीरियाई सेना में शामिल हो रहा है. अमेरिका ने इसे “conditions-based transition” यानी शर्तों के आधार पर वापसी बताया. ISIS के खतरे पर अब सीरियाई सरकार खुद निपट रही है, इसलिए अमेरिका को अपनी मौजूदगी की जरूरत नहीं रही.
सवाल 2: अमेरिकी सेना किन-किन देशों से पहले बोरिया-बिस्तर समेट चुकी है?
जवाब: अमेरिका ने पिछले सालों में कई जगहों से सैनिक वापस बुलाए हैं…
हालांकि अमेरिका पूरी दुनिया से नहीं, बल्कि सिर्फ जरूरत के हिसाब से सिकुड़ा है. जहां ISIS या आतंकवाद का खतरा कम हुआ, वहां से निकल लिया. लेकिन जहां चीन, रूस या ईरान जैसे बड़े खतरे हैं, वहां मौजूदगी बढ़ाई गई.
सवाल 3: दुनियाभर में अमेरिकी सैनिक कहां-कहां तैनात हैं और क्यों?  
जवाब: अमेरिका के पास दुनिया भर में 80 से ज्यादा देशों में 800 से अधिक सैन्य ठिकाने या पहुंच वाले स्थान हैं. 2025-2026 के आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा सैनिक इन देशों में हैं:
कुल मिलाकर 2 लाख से ज्यादा अमेरिकी सैनिक विदेश में तैनात हैं, क्योंकि अमेरिका का मानना है कि ताकत से शांति स्थापित होती है. चीन को इंडो-पैसिफिक में रोकना, रूस को यूरोप में, ईरान को मिडिल ईस्ट में और आतंकवाद का मुकाबला करना है. ट्रंप प्रशासन अब ज्यादा फोकस घरेलू सुरक्षा, कैरेबियन और पनामा कैनाल जैसी रणनीतिक जगहों पर कर रहा है.
सवाल 4: भारत में अमेरिकी बेस क्यों नहीं है?
जवाब: भारत में कभी भी अमेरिका का कोई सैन्य बेस नहीं बना और भविष्य में भी बनने की संभावना नहीं है. इसका सबसे बड़ा कारण भारत की स्ट्रैटजिक ऑटोनॉमी की नीति है. नेहरू काल से लेकर मोदी काल तक हर सरकार ने साफ कहा है कि कोई विदेशी सैनिक भारतीय जमीन पर नहीं रह सकता. इसकी 5 बड़ी वजहें हैं:
2025-2026 में भी NDAA 2026 कानून में भारत के साथ क्वाड और इंडो-पैसिफिक सहयोग बढ़ाने की बात है, लेकिन बेस की कोई चर्चा नहीं हुई. भारत अमेरिका से हथियार खरीदता है, संयुक्त अभ्यास करता है, लेकिन बेस नहीं बनने देने का सिद्धांत अटल है.
ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर (एबीपी लाइव- हिंदी) अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इससे पहले दो अलग-अलग संस्थानों में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी. जहां वे 5 साल से ज्यादा वक्त तक एजुकेशन डेस्क और ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. वे बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को भी लीड कर चुके हैं. ज़ाहिद देश-विदेश, राजनीति, भेदभाव, एंटरटेनमेंट, बिजनेस, एजुकेशन और चुनाव जैसे सभी मुद्दों को हल करने में रूचि रखते हैं.
Source: IOCL
We use cookies to improve your experience, analyze traffic, and personalize content. By clicking “Allow All Cookies”, you agree to our use of cookies.

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News