अप्रैल में ही लू का प्रचंड रूप: दुनिया के 20 सबसे गर्म शहरों में 19 भारत के, 44 डिग्री तक पहुंचा पारा – Jagran

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भारत इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है, जहां दुनिया के 20 सबसे गर्म शहरों में से 19 भारत के हैं। मौसम विभाग ने 22-24 अप्रैल तक लू की चेतावनी दी है, और …और पढ़ें
दुनिया के 20 सबसे गर्म स्थानों में से 19 भारत में
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। भारत इस समय भीषण गर्मी की ऐसी चपेट में है, जो न केवल देश बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गई है। एक्यूआई.इन के ताजा आंकड़ों के अनुसार दुनिया के 20 सबसे गर्म शहरों में से 19 शहर भारत के हैं। यह स्थिति अपने आप में बेहद गंभीर संकेत देती है कि इस बार गर्मी ने सामान्य सीमाओं को पार कर दिया है।
मौसम विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि 22 से 24 अप्रैल के बीच लू की स्थिति बनी रहेगी और तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। विज्ञानी मानकों के अनुसार जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाता है, तभी हीटवेव घोषित की जाती है, लेकिन इस बार कई शहर इस सीमा से काफी आगे निकल चुके हैं।
इस समय बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के शहर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इस सूची में सिर्फ एक विदेशी शहर नेपाल का लुंबिनी शामिल है, बाकी सभी भारतीय शहर हैं। यह साफ संकेत देता है कि भारत इस समय वैश्विक गर्मी के केंद्र में खड़ा है। इस असामान्य गर्मी के पीछे कई बड़े कारण एक साथ काम कर रहे हैं। 
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सबसे बड़ा कारण है अप्रैल के महीने में जमीन पर पड़ने वाली तेज धूप, जो सतह को तेजी से गर्म कर रही है। आमतौर पर अप्रैल को प्री-मानसून हीट पीरियड माना जाता है, लेकिन इस बार साफ आसमान के कारण सूरज की किरणें बिना किसी रुकावट के सीधे धरती को गर्म कर रही हैं, जिससे तापमान में तेज उछाल आ रहा है।
इसके साथ ही एक और महत्वपूर्ण कारण है यूरेशिया और हिमालयी क्षेत्रों में बर्फ की कमी। आम तौर पर बर्फ सूरज की तेज किरणों को वापस अंतरिक्ष में लौटा देती है, जिससे धरती ज्यादा गर्म नहीं होती। लेकिन इस बार बर्फ कम है, इसलिए सूरज की गर्मी सीधे जमीन में समा रही है और तापमान तेजी से बढ़ रहा है।
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वहीं समुद्र भी इस गर्मी को बढ़ाने में बड़ा रोल निभा रहा है। प्रशांत महासागर का पानी इस समय ज्यादा गर्म हो गया है जिससे मौसम का संतुलन बिगड़ रहा है। इसका असर यह हो रहा है कि जो हवाएं और सिस्टम आमतौर पर ठंडक लाते हैं, वे कमजोर पड़ गए हैं और गर्मी को फैलने का खुला मौका मिल गया है।
उत्तर-पश्चिम से चलने वाली शुष्क हवाएं स्थिति को और बिगाड़ रही हैं। ये हवाएं बादलों को बनने नहीं देतीं और बारिश की संभावना को खत्म कर देती हैं, जिससे गर्मी लगातार बढ़ती जाती है। वहीं दूसरी ओर दक्षिण और उत्तर-पूर्वी भारत में नमी और तूफान देखने को मिल रहे हैं, जो देश के मौसम में साफ विभाजन दिखाते हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में एक साथ इतने शहरों का अत्यधिक गर्म होना जलवायु परिवर्तन का सीधा संकेत है। यह सिर्फ सामान्य गर्मी नहीं, बल्कि भविष्य के खतरनाक ट्रेंड की झलक है, जिसमें हीटवेव की तीव्रता और आवृत्ति दोनों बढ़ती जाएंगी। अप्रैल के बाकी दिन भी राहत देने वाले नहीं दिख रहे हैं और जब तक प्री-मानसून बारिश नहीं आती, तब तक देश के बड़े हिस्से को इस भीषण गर्मी का सामना करना पड़ेगा।
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