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झारखंड की राजधानी रांची में मौजूद ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर परिसर में एक गार्ड की हत्या ने सनसनी फैला दी है. मंदिर में तैनात प्राइवेट गार्ड बिरसा मुंडा की बेरहमी से हत्या कर दी गई, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है. घटना जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र की है, जहां यह मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों ही दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
सुबह जैसे ही घटना की जानकारी मिली, पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे परिसर को घेर लिया. इस वारदात ने न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि श्रद्धालुओं में भी चिंता बढ़ा दी है. मंदिर परिसर में इस तरह की घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है. पुलिस के मुताबिक, अज्ञात अपराधी निर्माणाधीन हिस्से से मंदिर परिसर में घुसा और वहां सो रहे गार्ड बिरसा मुंडा पर हमला कर दिया. ये हमला इतना अचानक और घातक था कि बिरसा को संभलने का मौका तक नहीं मिला.
रांची के एसएसपी राकेश रंजन ने बताया कि गार्ड पर हमला सोते समय ही किया गया, जिससे यह साफ है कि अपराधी पूरी योजना के साथ आया था. मौके पर जांच के लिए एफएसएल टीम और स्निफर डॉग को भी लगाया गया है. पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है ताकि जल्द से जल्द आरोपी को गिरफ्तार किया जा सके.
घटनास्थल से एक दान पेटी का टूटा हुआ ताला भी बरामद हुआ है, जिससे इस मामले में चोरी की आशंका भी जताई जा रही है. पुलिस हत्या और चोरी दोनों एंगल से जांच कर रही है. मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि अपराधी की पहचान हो सके. अधिकारियों का कहना है कि हर छोटे-बड़े सबूत को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है. इस बीच मंदिर प्रशासन और स्थानीय लोगों में भी घटना को लेकर चिंता का माहौल है.
रांची का यह जगन्नाथ मंदिर करीब 300 साल पुराना बताया जाता है और इसे पुरी के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर बनाया गया था. इसका निर्माण तत्कालीन राजा एनी नाथ शहदेव ने कराया था. यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि ऐतिहासिक धरोहर भी माना जाता है. जहां हर साल भव्य रथ यात्रा निकाली जाती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं. मंदिर में लाखों रुपए का चढ़ावा भी आता है, जिससे इसकी सुरक्षा और महत्व और बढ़ जाता है.
मृतक बिरसा मुंडा के परिवार में तीन बेटे और दो बेटियां हैं, जो इस घटना के बाद गहरे सदमे में हैं. उनकी पत्नी मंदिर के बाहर ही बेहोश हो गई थीं, जबकि बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल था. परिजनों का कहना है कि बिरसा को कई महीनों से सिर्फ 1500 रुपये वेतन भी नहीं मिला था. इसके बावजूद वह मंदिर के प्रति अपनी आस्था के कारण काम करता रहा. बताया गया कि मंदिर के पुनर्निर्माण में उसने मजदूरी भी की थी और रात में अकेले ही सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाता था.
बिरसा की बेटियों ने आरोप लगाया कि उनके पिता की मंदिर के प्रति निष्ठा ही उनकी मौत का कारण बन गई. उनका कहना है कि कम वेतन में भी वह अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे और आखिरकार मंदिर की रक्षा करते हुए अपनी जान गंवा बैठे. इस घटना से परिवार का सहारा छिन गया है और उनके सिर से पिता का साया उठ गया है. फिलहाल मंदिर प्रबंधन की ओर से पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की बात कही जा रही है, लेकिन परिवार के दर्द को इससे कम नहीं किया जा सकता.
इस घटना पर राजनीति भी शुरू हो गई है. झारखंड बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि जिस हाई सिक्योरिटी इलाके में विधानसभा और उच्च न्यायालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थान मौजूद हैं, वहां इस तरह की हत्या होना बेहद चिंताजनक है. उन्होंने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को दयनीय बताते हुए कहा कि सिर्फ नई गाड़ियां खरीदने से कानून व्यवस्था नहीं सुधरती, बल्कि इसके लिए मजबूत इच्छाशक्ति और सख्त कार्रवाई की जरूरत होती है.
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