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पश्चिम बंगाल में चुनाव के बीच राशन वितरण घोटाले (PDS Scam) मामले में आज ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है. ED की कोलकाता जोनल यूनिट ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत 9 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी शुरू की है. ये कार्रवाई कोलकाता, बर्धमान और हाबरा के सप्लायर्स और एक्सपोर्टर्स के परिसरों पर की जा रही है.
साल 2020 में बशीरहाट पुलिस स्टेशन में एक FIR दर्ज किया गया था. इसमें सीमा शुल्क (Customs) के कमिश्नर ने शिकायत की थी कि कल्याणकारी योजनाओं के लिए आने वाले सरकारी गेहूं की बड़े पैमाने पर हेराफेरी की जा रही है. इसी के आधार पर ED ने अपनी कार्रवाई की है.
ED की जांच में पता चला कि आरोपियों ने सरकारी गेहूं को चोरी करने का एक व्यवस्थित तरीका बनाया था. सप्लायर्स, डीलरों और बिचौलियों की मिलीभगत से गरीबों के लिए आने वाला गेहूं कम दामों पर खरीदा जाता था.
जांच में ये भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य सरकार के मार्का वाली बोरियों को हटा दिया. उन्होंने उन बोरियों को पलट दिया या नई बोरियों में गेहूं भरा. इस PDS गेहूं को खुले बाजार में बेचने या निर्यात करने के लिए वैध स्टॉक के रूप में पेश किया गया. इससे आरोपियों ने अवैध तरीके से करोड़ों की कमाई की.
इस छापेमारी का मकसग घोटाले से जुड़े दस्तावेजों और ‘अपराध की कमाई’ का पता लगाना है. ED को शक है कि निरंजन चंद्र साहा और उनके सहयोगियों ने इसके जरिए भारी संपत्ति बनाई है.
इन 9 ठिकानों पर चल रही है तलाशी
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