Jharkhand News: बंधक बनाकर पिटाई और दिया कीड़ों वाला खाना, आलिया मिल्स के नरक से निकलकर किसी तरह घर पहुंचे म… – Zee News

Jharkhand Migrant Workers: तमिलनाडु के नमक्कल स्थित आलिया मिल्स में बंधक बनाकर रखे गए झारखंड के लगभग 60 मजदूर शनिवार को भागकर चक्रधरपुर पहुंचे. मजदूरों ने बताया कि वहां उन्हें कीड़ों वाला खाना दिया जाता था और विरोध करने पर पीटा जाता था.
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चक्रधरपुर: तमिलनाडु के नमक्कल अन्नागुर स्थित ‘आलिया मिल्स प्राइवेट लिमिटेड’ में बंधक बनाकर रखे गए झारखंड के करीब 60 मजदूर किसी तरह अपनी जान बचाकर शनिवार सुबह चक्रधरपुर स्टेशन पहुंचे. एर्नाकुलम-टाटा एक्सप्रेस से पहुंचे इन मजदूरों की आंखों में खौफ और चेहरे पर बेबसी साफ झलक रही थी. स्टेशन पहुंचने के बाद मजदूरों ने जो आपबीती सुनाई, वह रूह कंपा देने वाली है. उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें जानवरों की तरह रखा गया, पीटा गया और जब वे भागकर अपने राज्य पहुंचे, तो वहां भी उन्हें मदद के बजाय दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा.

एक तरफ जहां झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोशल मीडिया पर डीसी और माइग्रेशन सेल को आदेश देकर मजदूरों की मदद के दावे कर रहे थे, वहीं जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आई. चक्रधरपुर पहुंचे मजदूरों ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें सरकार की तरफ से किसी भी तरह की सहायता नहीं मिली. वे बिना मजदूरी के, भूखे-प्यासे अपनी जान बचाकर वहां से भागे थे. ट्रेन में सफर के दौरान उनके पास पैसे नहीं थे, फिर भी बचे-खुचे पैसे जोड़कर उन्होंने टीटीई को फाइन दिया. लेकिन सफर के दौरान टीटीई और पेंट्रीकार मैनेजर ने उनके साथ बेहद बुरा बर्ताव किया. यह सिलसिला चक्रधरपुर स्टेशन पहुंचने के बाद भी नहीं रुका, जहां टीटीई ने उन्हें घेर लिया और पैसों की मांग करते हुए काफी देर तक रोककर रखा. बाद में पत्रकारों के हस्तक्षेप के बाद ही उन्हें छोड़ा गया.

मजदूरों ने तमिलनाडु की उस मिल के भीतर होने वाले जुल्मों का पर्दाफाश करते हुए बताया कि वहां मजदूरों का भयंकर शोषण किया जा रहा है. मजदूरों को खाने में कीड़े वाला घटिया भोजन दिया जाता है. जब कोई मजदूर इसका विरोध करता है, तो कंपनी प्रबंधन बाहर से गुंडों को बुलाकर उनकी बेरहमी से पिटाई करवाता है. पुरुषों के साथ-साथ महिला मजदूरों को भी नहीं बख्शा जाता. मजदूरों ने आरोप लगाया कि उन्हें न तो पूरी सैलरी दी जा रही थी और न ही छुट्टी. अगर कोई आपात स्थिति में घर जाना चाहे, तो उसे बंधक बना लिया जाता है और मिल के गेट पर ताला लगा दिया जाता है. अत्याचार की तस्वीर खींचने या वीडियो बनाने पर मोबाइल छीनकर मारपीट की जाती है.

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मजदूरों की इस दुर्दशा के पीछे ओडिशा के दो एजेंटों, चंदन और सुशील का हाथ बताया जा रहा है. इन एजेंटों ने मजदूरों को बेहतर रहन-सहन, अच्छा खाना और मोटी सैलरी का लालच देकर तमिलनाडु की इस मिल में भेजा था. लेकिन मिल पहुंचते ही हकीकत कुछ और निकली. जब मजदूरों ने वहां के हालातों का विरोध किया, तो उन्हें पीटा गया. हद तो तब हो गई जब मजदूरों के चक्रधरपुर पहुंचने पर भी इन एजेंटों का खौफ कम नहीं हुआ; उन्होंने मजदूरों को फोन पर अंजाम भुगतने की धमकी तक दे डाली.
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इस पूरी घटना ने झारखंड सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. राज्य सरकार एक तरफ अपने नागरिकों को घर में रोजगार देने में विफल रही है, वहीं दूसरी तरफ जब राज्य के बाहर उनके साथ दरिंदगी होती है, तो उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है. मजदूरों ने भारी मन से कहा कि उन्हें इस बात का सबसे ज्यादा दुख है कि उनकी अपनी सरकार ने भी इस मुश्किल घड़ी में उनकी सुध नहीं ली. भूखे-प्यासे और जिल्लत झेलते हुए ये मजदूर अब बस किसी तरह अपने घर पहुंचना चाहते हैं.
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