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व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर के दौरान हुई गोलीबारी के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि वे पूरी तरह सुरक्षित हैं. उन्होंने कहा कि जैसे ही फायरिंग हुई, सुरक्षा एजेंसी यूनाइटेड स्टेट सीक्रेट सर्विस ने तुरंत और बहुत तेजी से कार्रवाई की, जिससे बड़ा हादसा टल गया. ट्रंप ने सुरक्षाकर्मियों की जमकर तारीफ की और कहा कि उनकी बहादुरी और सतर्कता की वजह से हालात जल्दी काबू में आ गए. इस घटना में एक सिक्योरिटी ऑफिसर घायल हुआ, लेकिन बुलेटप्रूफ सुरक्षा होने की वजह से उसकी जान बच गई. वहीं, हमलावर को भी तुरंत पकड़ लिया गया.
इस पूरी घटना के बाद से यूनाइटेड स्टेट सिक्रेट सर्विस की काफी चर्चा हो रही है. लोग जानना चाहते हैं कि यह एजेंसी इतनी खास क्यों है और कैसे काम करती है. दरअसल, यह अमेरिका की एक बेहद प्रशिक्षित सुरक्षा एजेंसी है, जिसका मुख्य काम राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और अन्य बड़े नेताओं की सुरक्षा करना होता है. इसके एजेंट हर समय सतर्क रहते हैं, खतरे का अंदाजा पहले से लगाने की ट्रेनिंग लेते हैं और किसी भी आपात स्थिति में सेकेंडों में फैसला लेकर कार्रवाई करते हैं. यही वजह है कि ऐसी गंभीर घटना के बावजूद सभी बड़े नेता सुरक्षित बच गए.
यूनाइटेड स्टेट सीक्रेट सर्विस क्या है?
यूनाइटेड स्टेट सीक्रेट सर्विस एक सरकारी एजेंसी है. इसका काम सिर्फ राष्ट्रपति की सुरक्षा करना ही नहीं है, बल्कि देश की आर्थिक और साइबर सुरक्षा को भी मजबूत बनाना है. आसान भाषा में समझें तो यह एजेंसी दो बड़े काम करती है- एक, देश के बड़े नेताओं की सुरक्षा और दूसरा, आर्थिक और साइबर अपराधों की जांच. सीक्रेट सर्विस अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्युरिटी के तहत काम करती है. पहले यह डिपार्टमेंट ऑफ ट्रेजरी के अधीन थी, क्योंकि शुरुआत में इसका मुख्य काम नकली नोटों को रोकना था. बाद में जब देश में सुरक्षा से जुड़े खतरे बढ़ने लगे, तो इसकी जिम्मेदारियां भी बढ़ा दी गईं.
आज यह एजेंसी राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, उनके परिवार, पूर्व राष्ट्रपति और विदेश से आने वाले बड़े नेताओं की सुरक्षा करती है. इसके अलावा यह बैंक फ्रॉड, साइबर क्राइम, आईडेंटिटी थेफ्ट जैसे अपराधों की जांच भी करती है.
सीक्रेट सर्विस का मुख्य काम
सीक्रेट सर्विस के दो सबसे बड़े काम हैं:
1. सुरक्षा का ऐसे करते हैं प्लान
यह एजेंसी अमेरिका के सबसे बड़े नेताओं की सुरक्षा करती है. इसमें राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति बनने वाले व्यक्ति, उनके परिवार पूर्व राष्ट्रपति और उनके परिवार, विदेश से आने वाले बड़े नेता शामिल होते हैं. इसके अलावा यह वाइट हाउस, उपराष्ट्रपति के घर और कई महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों की सुरक्षा भी करती है. सीक्रेट सर्विस सिर्फ बॉडीगार्ड की तरह काम नहीं करती, बल्कि हर खतरे को पहले से पहचानने की कोशिश करती है. इसके लिए यह एजेंसी हर जगह पहले से जांच करती है और सुरक्षा प्लान बनाती है. इसके साथ ही यह स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर काम करती है और खुफिया जानकारी जुटाती है.
अगर किसी बड़े कार्यक्रम को नेशनल स्पेशल सिक्योरिटी इवेंट (जैसे राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण) घोषित किया जाता है तो उसकी पूरी सुरक्षा की जिम्मेदारी इसी एजेंसी के पास होती है.
2. जांच का जिम्मा भी इनके हवाले
सीक्रेट सर्विस का दूसरा बड़ा काम है आर्थिक और साइबर अपराधों की जांच करना. इसमें नकली नोट, बैंक धोखाधड़ी, क्रेडिट कार्ड फ्रॉड ऑनलाइन ठगी, पहचान चोरी, हैकिंग और साइबर अटैक शामिल है. यह एजेंसी ब्यूरो ऑफ इंवेस्टीगेशन जैसी एजेंसियों के साथ मिलकर भी काम करती है और आतंकवाद से जुड़ी जांच में भी मदद करती है.
इसकी शुरुआत कब हुई?
सीक्रेट सर्विस की शुरुआत 1865 में हुई थी. उस समय अमेरिका में नकली नोटों की समस्या बहुत ज्यादा थी, इसलिए सरकार ने इस एजेंसी को बनाया. धीरे-धीरे इसने अन्य अपराधों की जांच भी शुरू कर दी. बाद में 1901 में राष्ट्रपति विलियम मैककिनले की हत्या के बाद यह फैसला लिया गया कि अब राष्ट्रपति की सुरक्षा भी यही एजेंसी करेगी.
समय के साथ आया बदलाव
समय के साथ यह एजेंसी बहुत बड़ी और ताकतवर बन गई. इसमें कई बदलाव किए गए. जैसे-
1901 में इन्हे राष्ट्रपति की सुरक्षा की जिम्मेदारी मिली. इसके बाद 2003 में इसे ट्रेजरी से हटाकर होमलैंड सिक्योरिटी में शामिल किया गया और आज के समय में यह दुनिया की सबसे एडवांस सुरक्षा एजेंसियों में गिनी जाती है.
सीक्रेट सर्विस कैसे काम करती हैं?
इस एजेंसी के एजेंट बहुत ही खास ट्रेनिंग से गुजरते हैं. उन्हें खतरों को पहचानना, भीड़ में सुरक्षा देना, हथियारों का इस्तेमाल और साइबर अपराध पकड़ना है. ये एजेंट अक्सर साधारण कपड़ों में होते हैं, ताकि लोग उन्हें पहचान न सके. आपने फिल्मों में देखा होगा कि वे कान में छोटा सा ईयरपीस लगाते हैं.
इनको मिलती है खास जिम्मेदारियां
सीक्रेट सर्विस कई और खास काम भी करती है. जैसे- बड़े इवेंट्स की सुरक्षा, विदेशों में नेताओं की सुरक्षा, साइबर क्राइम टास्क फोर्स चलाना होता है. इसके साथ ही ये बच्चों के शोषण और लापता मामलों की जांच करती है. यह एजेंसी इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स टास्क फोर्स’ भी चलाती है, जो दुनिया भर के साइबर अपराधियों को पकड़ने में मदद करती है.
सुरक्षा क्यों इतनी जरूरी है?
अमेरिका के राष्ट्रपति दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक होते हैं. ऐसे में उनकी सुरक्षा बहुत जरूरी होती है. इतिहास में कई बार राष्ट्रपति पर हमले हो चुके हैं, जैसे-जॉन एफ. कैनेडी की 1963 में हत्या. वे अमेरिका के 35वें राष्ट्रपति थे. 22 नवंबर 1963 को वह टेक्सास के डलास शहर में एक दौरे पर गए थे. उस दिन वह अपनी पत्नी के साथ खुली कार में लोगों का अभिवादन कर रहे थे.अचानक, एक बिल्डिंग की ऊंचाई से उन पर गोलियां चलाई गईं. उन्हें गंभीर चोटें आईं और थोड़ी ही देर में उनकी मौत हो गई. यह घटना पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़ा झटका थी.
इस हत्या के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया. लेकिन वह कोर्ट तक पहुंच पाता, उससे पहले ही उसे भी गोली मार दी गई. इस वजह से आज भी कई लोग इस घटना को लेकर अलग-अलग सवाल उठाते हैं और इसे एक रहस्य मानते हैं. इस घटना के बाद अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों, खासकर राष्ट्रपति की सुरक्षा में बहुत बड़े बदलाव किए गए.
इसके बाद 1981 में रोनाल्ड रीगन पर हमला. रोनाल्ड रीगन अमेरिका के 40वें राष्ट्रपति थे. 30 मार्च 1981 को वह वॉशिंगटन डी.सी. के एक होटल से बाहर निकल रहे थे, तभी उन पर अचानक हमला हुआ. हमलावर ने राष्ट्रपति पर कई गोलियां चलाईं. एक गोली टकराकर रीगन के शरीर में लग गई, जिससे वह घायल हो गए. इस हमले में उनके साथ खड़े कुछ अन्य लोग और एक पुलिस अधिकारी भी घायल हुए. लेकिन अच्छी बात यह रही कि डॉक्टरों की तुरंत मदद से रीगन की जान बच गई और कुछ समय बाद वह ठीक हो गए. इस घटना में सीक्रेट सर्विस एजेंट्स ने बहुत बहादुरी दिखाई. एक एजेंट ने अपनी जान खतरे में डालकर राष्ट्रपति को बचाने की कोशिश की, जिससे बड़ा नुकसान टल गया. इन घटनाओं के बाद सुरक्षा और भी मजबूत कर दी गई.
आधुनिक दौर में सीक्रेट सर्विस का भी है रोल
आज के समय में खतरे सिर्फ बंदूक या बम से नहीं, बल्कि इंटरनेट से भी आते हैं. इसलिए सीक्रेट सर्विस अब साइबर सिक्योरिटी पर भी ज्यादा ध्यान दे रही है. यह एजेंसी हैकर्स को पकड़ने के साथ-साथ ऑनलाइन फ्रॉड भी रोकती है डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा करती है.विवाद और लेकिन इसके बावजूद यह एजेंसी लगातार अपने सिस्टम को बेहतर बनाती रहती है. इस एजेंसी में हजारों लोग काम करते हैं. जिसमें स्पेशल एजेंट, यूनिफॉर्म पुलिस, टेक्निकल स्टाफ हैं. इनका सेलेक्शन बहुत कठिन होता है. बहुत कम लोग ही इसमें चयनित हो पाते हैं.
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