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नेशनल कॉन्फ्रेंस सांसद आगा सैयद रूहुल्ला मेहदी ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक से पांच हिंदी भाषी राज्यों में विधायी शक्ति का केंद्रीकरण हो सकता था। …और पढ़ें
महिला आरक्षण बिल पर NC सांसद आगा रूहुल्ला का हमला (फाइल फोटो)
राज्य ब्यूरो, जम्मू। नेशनल कान्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रूहुल्ला मेहदी ने कहा कि यदि महिला आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पारित हो जाता तो देश के पांच हिंदी भाषी राज्यों में विधायी शक्ति का केंद्रीकरण हो सकता था।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में महिला आरक्षण विधेयक संसद में सर्वसम्मति से पारित हुआ था, लेकिन विपक्ष ने एक ऐसे विधेयक को पराजित कर दिया, जो महिला आरक्षण लागू करने के नाम पर एक त्रुटिपूर्ण परिसीमन प्रक्रिया को जन्म दे सकता था।
जम्मू-कश्मीर सरकार के कामकाज पर टिप्पणी करते हुए मेहदी ने कहा कि मौजूदा सरकार, जो विशेष दर्जे की बहाली के वादे के साथ सत्ता में आई थी, अब राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए भी प्रयास करती नहीं दिख रही है।
मेहदी ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक अभी भी जीवित है, लेकिन जो विधेयक पराजित हुआ वह तथाकथित परिसीमन बिल था, जो जम्मू-कश्मीर की तरह गेरिमैंडरिंग (सीमाओं के मनमाने पुनर्निर्धारण) का कारण बन सकता था। यहां संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं सांप्रदायिक आधार पर बदली गई थीं।
प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया के तहत उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ सकती थी। इन राज्यों को लगभग 400 सीटें मिल सकती थीं, जिससे वे पूरे देश के लिए फैसले ले सकते थे, जैसे कि अनुच्छेद 370 के मामले में हुआ।
अनुच्छेद 370 का उल्लेख करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इसे जम्मू-कश्मीर के लोगों की सहमति से हटाया गया था। इसी तरह यह विधेयक दक्षिण भारत, बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों के मताधिकार को प्रभावित कर सकता था।
उन्होंने कहा कि लोगों ने केवल राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए नेकां को वोट नहीं दिया था, बल्कि उनसे छीने गए संवैधानिक अधिकारों की बहाली के लिए जनादेश दिया था। उन्होंने इसे जम्मू-कश्मीर के लोगों के जनादेश के साथ अन्याय बताया।