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महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा चालकों पर मराठी को अनिवार्य बनाने के फैसले को लागू करने के लिए स्पेशल वेरिफिकेशन अभियान शुरू किया जाएगा. यह अभियान 1 मई से 15 अगस्त तक चलाया जाएगा. जिसकी सूचना परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने दी है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अभियान के दौरान ड्राइवरों के लाइसेंस केवल मराठी न जानने के कारण रद्द नहीं किए जाएंगे. हालांकि, नियमों का उल्लंघन करने वालों और अवैध परिवहन में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
सरनाईक ने कहा, “कार्रवाई केवल मौजूदा कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही की जाएगी.”
यह अभियान राज्य के सभी 59 क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) में एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर रविंद्र गायकवाड़ की अध्यक्षता वाली समिति की देखरेख में चलाया जाएगा.
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परिवहन मंत्री ने कहा, “अगर कोई महाराष्ट्र में व्यापार करना चाहता है, तो मराठी जानना अनिवार्य है.” उन्होंने यह भी बताया कि ऑटो और टैक्सी यूनियनों के प्रतिनिधियों ने इस फैसले का पूरा समर्थन किया है.
इसके साथ ही मीरा-भयंदर में हाल ही में चलाए गए एक विशेष अभियान का हवाला देते हुए सरनाईक ने कहा कि 3,443 ऑटो-रिक्शा का निरीक्षण किया गया, जिसमें 565 चालक मराठी भाषा जानने में असफल रहे.
उन्होंने कहा, “लेकिन इन ड्राइवरों ने भाषा सीखने की इच्छा दिखाई है.”
सरनाईक ने आगे कहा कि गायकवाड़ की अध्यक्षता वाली समिति इस अभियान की डेली और वीकली आधार पर निगरानी करेगी और निरीक्षण रिपोर्टों के आधार पर आरटीओ को निर्देश जारी करेगी.
सरनाईक के अनुसार, मराठी सीखने के इच्छुक चालकों के लिए आरटीओ कार्यालयों में सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिसमें कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ द्वारा ट्रेनिंग सपोर्ट दिया जाएगा. बुकलेट्स जैसी सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी.
सरनाईक ने कहा कि प्रशिक्षण पूरा करने वाले चालकों को राज्य सरकार द्वारा प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे, जिनकी आवश्यकता लाइसेंस रिन्यूअल के समय होगी.
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