Feedback
क्रेमलिन ने जानकारी दी है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के ओपेक+ से अलग होने के फैसले के बावजूद रूस इसमें बना रहेगा. रूस को उम्मीद है कि दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों का यह समूह आगे भी अपना काम जारी रखेगा.
यूएई ने मंगलवार को पेट्रोलियम निर्यातक देशों के ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज से अलग होने की घोषणा की.
इस बीच क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने ओपेक+ को एक जरूरी संगठन बताया, खासकर वैश्विक बाजारों में मौजूदा उथल-पुथल के दौरान इसकी काफी अहमियत है. रॉयटर्स के मुताबिक पेस्कोव ने कहा, यह फॉर्मेट ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव को काफी हद तक कम करने में मदद करता है और बाजारों को स्थिर करना संभव बनाता है.
पेस्कोव ने बताया कि रूस संयुक्त अरब अमीरात के ओपेक+ से अलग होने के फैसले का सम्मान करता है. इसके साथ ही उम्मीद जताई कि खाड़ी देश के साथ मॉस्को की ऊर्जा वार्ता जारी रहेगी.
बता दें, रूस ने 2016 में ओपेक+ में शामिल होने का फैसला किया था. अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुमानों के अनुसार, पिछले साल इस समूह ने दुनिया के लगभग 50 प्रतिशत तेल और तेल तरल पदार्थों का उत्पादन किया था. ओपेक+ में यूएई चौथा सबसे बड़ा उत्पादक था, जबकि रूस सऊदी अरब के बाद दूसरे स्थान पर है.
संयुक्त अरब अमीरात का ओपेक से बाहर होना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है. ट्रंप लंबे समय से ओपेक पर आरोप लगाते रहे हैं कि यह संगठन तेल की कीमतों को कृत्रिम रूप से बढ़ाकर दुनिया का शोषण करता है.
अमेरिका द्वारा खाड़ी देशों को दिए जाने वाले सैन्य समर्थन को भी तेल कीमतों से जोड़ा है. ट्रंप का कहना है कि अमेरिका ओपेक सदस्य देशों की सुरक्षा करता है, जबकि वे ऊंची तेल कीमतों के जरिए लाभ उठाते हैं.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू