भारत के झारखंड राज्य के रहने वाले एक सात साल के बच्चे ने शुक्रवार (1 मई, 2026) को तैराकी की दुनिया में कुछ ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिससे उसका नाम दुनिया के उन कुछ चुनिंदा लोगों में शामिल हो गया है, जिन्होंने अकल्पनीय कामों को सफलतापूर्वक अंजाम देकर इतिहास रचा है. दरअसल, झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले सात साल के ईशांक सिंह ने भारत और श्रीलंका के बीच स्थित पाक स्ट्रेट को तैरकर पार किया.
दोनों देशों के बीच स्थित इस पाक स्ट्रेट की लंबाई 29 किलोमीटर है, जिसे सात साल के ईशांक सिंह ने 9 घंटे और 50 मिनट में तैरकर पार कर लिया. इसके साथ ही, ईशांक सिंह ने 29 किमी लंबे पाक स्ट्रेट को तैरकर पार करते हुए दुनिया के सबसे कम उम्र के तैराक बनने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है. इससे पहले यह रिकॉर्ड तमिलनाडु के जय जशवंत के नाम था, जिन्होंने साल 2019 में 10 साल की उम्र में 10 घंटे 30 मिनट में यह दूरी पूरी की थी.
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बेहद चुनौतीपूर्ण है भारत-श्रीलंका के बीच का यह जलमार्ग
भारत और श्रीलंका के बीच यह जलमार्ग तेज धाराओं, समुद्री लहरों और अनिश्चित मौसमी गतिविधियों की वजह से काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता है. इसके बावजूद, सात साल के ईशांक ने इन सभी मुश्किलों को पार करते हुए श्रीलंका के तलाईमन्नार से भारत के धनुषकोडी स्थित अरिचलमुनई तक करीब 29 किलोमीटर की दूरी को 10 घंटे से भी कम समय में तैरकर पूरी की. उन्होंने श्रीलंका के तलाईमन्नार से शुक्रवार (1 मई, 2026) को सुबह 4 बजे से तैरना शुरू किया और दोपहर 1 बजकर 50 मिनट पर इस चुनौती को पूरा किया.
इतिहास रचने के बाद लोगों ने गर्मजोशी से किया स्वागत
सात साल के ईशांक सिंह जब समुद्री चुनौतियों से लड़कर करीब 10 घंटे के बाद जब रामेश्वरम के तट पर पहुंचे, तो वहां मौजूद अधिकारियों और समर्थकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया.
असाधारण प्रतिभा…
महज 7 वर्ष की उम्र में झारखंड से नन्हे इशांक ने श्रीलंका और भारत के बीच 29 किमी लंबे Palk Strait को पार कर ऐतिहासिक पल अपने नाम किया है।
इशांक की यह सफलता अनुशासन और लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने न सिर्फ झारखंड, बल्कि पूरे देश का… pic.twitter.com/3T5X30X6yW
इतना ही नहीं, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी सात वर्षीय ईशांक सिंह की इस उपलब्धि की सराहना की और उन्हें एक असाधारण प्रतिभा करार दिया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘ईशांक की सफलता अनुशासन और अपने लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण का एक शानदार उदाहरण है. उन्होंने न सिर्फ झारखंड, बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है.’
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Source: IOCL
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