जो भारतीय संस्कृति, भाषा, भोजन से प्रेम नहीं करता उसे भारत में रहने का अधिकार नहीं: मुनि श्री प्रतीक सागर – Dainik Bhaskar

भास्कर न्यूज | लुधियाना
पंजाब सरकार के राजकीय अतिथि क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज अहिंसा शाकाहार पदयात्रा के साथ पाम सिटी को कोहाड़ा से चलकर जैन स्थानक चंडीगढ़ रोड पर जैसे ही पहुंचे जय जयकारों से सारा आकाश मंडल भक्तों ने गुंजायमान कर दिया। मंगलाचरण के साथ धर्म सभा का प्रारंभ हुआ, दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष राकेश जैन, जैन स्थानक के अध्यक्ष दीपक जैन, तेरापंथ जैन समाज के अध्यक्ष दिलीप जैन, पंजाब दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष राजकुमार जैन, तेरापंथ युवा मंडल के अध्यक्ष उज्जवल जैन ने श्रीफल बैठकर मुनि श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।
क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा, 1 घंटे की खुशी चाहिए तो खिले हुए फूलों को देखकर खिलें, 1 दिन की खुशी चाहिए तो डांस क्लब में डांस करें, 4 महीने खुशी के लिए शादी करें, एक वर्ष की खुशी के लिए खूब पैसा कमाएं। 5 साल की खुशी चाहिए तो देश के राष्ट्रपति बन जाएं, जीवन भर की खुशी चाहिए तो गुरु का दामन थाम लें। मुनि श्री ने आगे कहा कि जो भारतीय संस्कृति, भारतीय भाषा,भारतीय भोजन से प्रेम नहीं करता है उसे भारत में रहने का अधिकार नहीं है उसे भारत छोड़ देना चाहिए।
प्रात: 8:30 बजे धर्मसभा का होगा आयोजन क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज आज 2 मई को प्रातः 5:30 अहिंसा पदयात्रा के साथ आत्म पब्लिक स्कूल आत्म नगर के लिए प्रस्थान करेंगे जहां प्रातः 8:30 बजे धर्म सभा का आयोजन तथा शाम 7:00 बजे गुरु भक्ति आरती का आयोजन होगा। 2 मई को पूरे दिन मुनि श्री स्कूल में ही विराजमान रहेंगे। यहां माता-पिता के गौरव को बचाने के लिए संतानों ने अपने जीवन का बलिदान देकर उनके स्वाभिमान बचाया।
तीर्थंकर ऋषभदेव की पुत्री ब्राह्मणी और सुंदरी जीवन भर का ब्रह्मचर्य वाला, भीष्म पितामह शादी नहीं करने का संकल्प किया, पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए। राम ने पिता का वचन पूरा करने के लिए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार कर लिया। नेमिनाथ से विवाह न होने पर राजुल ने दूसरे युवराज से विवाह करने का नहीं सोचा तभी तो सन्यास मार्ग को धारण कर लिया। भारतीय संस्कृति में नारी अपनी कुर्बानी देती है मगर पर पुरुष को नहीं आने देती है। शादी के पहले लड़के और लड़की का लिविंग रिलेशन रहना भारतीय संस्कृति के लिए अभिशाप है।
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