राघव चड्ढा से Gen Z का क्यों हुआ मोहभंग? परिणीति चोपड़ा से शादी के बाद से ही बदलने लगा मिजाज – Live Hindustan

Raghav Chadha News: आम आदमी पार्टी (AAP) से हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए राघव चड्ढा को इन दिनों एक अजीब विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बिना सड़कों पर उतरे ही अनफॉलो बटन के साथ आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल का समर्थक उनका विरोध कर रहे हैं। कभी केजरीवाल की पार्टी के ‘पोस्टर बॉय’ रहे राघव चड्ढा को भाजपा में शामिल होने के बाद इसी कड़वी हकीकत का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं का एक बड़ा वर्ग अब उनसे किनारा कर रहा है। उनमें अधिकांश जेनरेशन जेड (Gen Z) के युवा है।
राघव चड्ढा को उनकी शांत, सुलझी हुई और आधुनिक छवि के कारण युवाओं के बीच काफी पसंद किया जाता था। एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से राजनेता बने चड्ढा का ब्लिंकिट डिलीवरी जैसा सामान्य व्यवहार उन्हें एक पुराने ढर्रे के नेता के बजाय एक एक्सेसिबल व्यक्तित्व बनाता था। हालांकि, जानकारों का मानना है कि उनका अचानक पाला बदलना युवाओं को ‘पुरानी और गंदी राजनीति’ की वापसी जैसा महसूस हुआ है।
चाहे वह ‘ब्लिंकिट’ से सामान मंगाने वाला वायरल वीडियो हो या रोजमर्रा की आम समस्याओं पर बात करना, राघव चड्ढा एक ‘दूरी पर स्थित नेता’ के बजाय ‘पड़ोस के लड़के’ जैसे नजर आते थे। अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा के साथ उनके जुड़ाव ने भी उनके प्रति एक जिज्ञासा और आकर्षण पैदा किया। इस शादी के बाद राघव चड्ढा की छवि एक ग्लैमरस नेता के तौर पर बन गई। जिस जेनरेशन ने उन्हें सिर आंखों पर बिठाया था, उनसे किनारा करता दिख रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीति में छवि बहुत नाजुक होती है। न्यूज-18 ने अपनी एक रिपोर्ट में जेएनयू में राजनीति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर अजय गुडवर्ती के हवाले से कहा, “युवा सांसदों से अक्सर सार्वजनिक नैतिकता और स्वच्छ राजनीति की एक नई संस्कृति लाने की उम्मीद की जाती है। चड्ढा ने अपनी छवि एक ऐसे नेता के रूप में बनाई थी जो आम जनता के मुद्दों से सरोकार रखता है, लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और उनकी अनुपस्थिति या भूमिका ने उनके युवा समर्थकों को निराश किया है।”
प्रोफेसर गुडवर्ती आगे कहते हैं कि जेन-जी ‘विश्वासघात’ या ‘व्यक्तिगत विशेषाधिकार’ को सुरक्षित रखने वाले राजनीतिक कदमों के प्रति बेहद संवेदनशील है। अगर उन्हें लगता है कि कोई नेता आदर्शवाद को छोड़कर ‘पुरानी और गंदी राजनीति’ के ढर्रे पर चल रहा है, तो वे उसे तुरंत दंडित करते हैं।
डिजिटल दुनिया में अनफॉलो करना केवल एक तकनीकी क्रिया नहीं है, बल्कि यह एक राजनीतिक बयान है। यह बिना शोर मचाए, बिना बहस किए अपनी असहमति दर्ज कराने का एक तरीका है। डिजिटल स्पेस में वायरल होना आसान है, लेकिन सकारात्मक लोकप्रियता को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है। चड्ढा ने जो ऑनलाइन पहचान बनाई थी, उसी की वजह से अब उनके हर कदम की सूक्ष्मता से जांच हो रही है। सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स का कम होना यह दिखाता है कि डिजिटल स्पेस में अपनी साख बनाए रखने के लिए लगातार पारदर्शी और प्रासंगिक बने रहना कितना जरूरी है।
बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
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