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इंवेस्ट इंडिया के अनुसार, दुनिया के दस प्रमुख देश भारत के दस महत्वपूर्ण क्षेत्रों में 45 अरब डॉलर का निवेश करने के इच्छुक हैं। पिछले वित्त वर्ष में गु …और पढ़ें
राजीव कुमार, नई दिल्ली। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के अधीन काम करने वाली एजेंसी इंवेस्ट इंडिया के मुताबिक दुनिया के दस देश भारत में सबसे अधिक निवेश करने के इच्छुक है।
इंवेस्ट इंडिया के मुताबिक इलेक्ट्रानिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्यूफैक्चरिंग (ईएसडीएम), ऊर्जा, फार्मा, इलेक्टि्रक ऑटो, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, कैपिटल गुड्स, इंफ्रा, केमिकल्स व क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में प्रमुख विकसित देश भारत में निवेश करना चाहते हैं।
इंवेस्ट इंडिया के अनुमान के मुताबिक इन सेक्टर में भारत में 45 अरब डॉलर के निवेश के अवसर है और इस निवेश को लेकर इंवेस्ट इंडिया 5000 निवेशकों के संपर्क में हैं।
अमेरिका, जर्मनी, जापान, ¨सगापुर, दक्षिण कोरिया, यूएई, ताइवान, ब्रिटेन, फ्रांस और आस्ट्रेलिया जैसे देश के निवेशक भारत में निवेश करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
गत वित्त वर्ष 2025-26 में इंवेस्ट इंडिया के प्रयासों से 6.1 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया गया। इनमें सबसे अधिक 263.80 करोड़ डॉलर का निवेश गुजरात में किया गया। महाराष्ट्र में 81 करोड़ डॉलर, उत्तर प्रदेश में 23.2 करोड़ डॉलर का निवेश किया गया।
बिहार में मात्र 20 लाख डॉलर का निवेश किया गया। इंवेस्ट इंडिया की सीईओ निवरुति राय के मुताबिक जिन राज्यों में निवेश का इको सिस्टम है, वहां अधिक निवेश हो रहे हैं।
लेकिन उनका प्रयास है कि बिहार जैसे राज्य में भी निवेश लाया जाए ताकि एक संतुलित विकास हो। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य निवेशकों को आकर्षित करने में अधिक सफल होते दिख रहे हैं। मध्य प्रदेश में 82 करोड़ डॉलर का पिछले वित्त वर्ष में निवेश किया गया।
राजस्थान में यह निवेश 32.8 करोड़ डॉलर, तेलंगाना में 27.1 करोड़ डॉलर, हरियाणा में 17.6 करोड़ डॉलर, असम में 50 लाख डॉलर, दिल्ली में 8.9 करोड़ डॉलर, कर्नाटक में 11.6 करोड़ डॉलर तो सिक्किम में 2.7 करोड़ डॉलर निवेश किए गए।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार जैसे राज्य में निवेश कम होने की सबसे बड़ी वजह इको सिस्टम की कमी है। विदेशी निवेशक सिर्फ भारत में ही अपने उत्पाद को बेचने के लिए निवेश नहीं करते हैं।
वे चाहते हैं कि भारत में बनाए जाने वाले उनके सामान दुनिया भर में बेचे जा सके। इस काम के लिए बंदरगाह और एयर कार्गो जैसे इंफ्रा की बेहतरीन सुविधा होनी चाहिए जो बिहार में नहीं है।
बिहार जैसे राज्यों में मैन्यूफैक्चरिंग का पहले से कोई इको-सिस्टम नहीं है। किसी एक प्रमुख उत्पाद को बनाने में सैकड़ों आइटम की जरूरत है और निवेशक यह देखता है वे कि उनके उत्पाद से जुड़े छोटे-छोटे आइटम किन राज्यों में आसानी से उपलब्ध है।
उदाहरण के लिए गुजरात में चिप उत्पादन की सबसे अधिक फैक्ट्री लग रही है। क्योंकि चिप निर्माण में केमिकल की काफी आवश्यकता है। गुजरात में केमिकल मैन्यूफैक्च¨रग का हब पहले से हैं।