MP सरकार का फैसला: 90 डिग्री ब्रिज केस के सभी 7 इंजीनियर बहाल… विवाद के बाद हुए थे सस्पेंड – AajTak

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भोपाल के चर्चित 90 डिग्री एंगल वाले रेलवे ओवरब्रिज मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पहले सस्पेंड किए गए सभी 7 इंजीनियरों को बहाल कर दिया है. इस फैसले के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है. जिन इंजीनियरों को बहाल किया गया है, उनमें दो चीफ इंजीनियर भी शामिल हैं. हालांकि सरकार ने साफ किया है कि मामले की विभागीय जांच अभी जारी रहेगी और जल्द ही जांच अधिकारी नियुक्त किया जाएगा.
इंजीनियर-इन-चीफ कार्यालय में हुई तैनाती
सरकार द्वारा जारी आदेश के मुताबिक बहाल किए गए सभी इंजीनियरों की पोस्टिंग इंजीनियर-इन-चीफ (ईएनसी) कार्यालय में की गई है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पीडब्ल्यूडी ब्रिज डिवीजन के तत्कालीन प्रभारी चीफ इंजीनियर जीपी वर्मा, तत्कालीन एसडीओ रवि शुक्ला और उप यंत्री उमाशंकर मिश्रा के खिलाफ विभागीय जांच जारी रहेगी. इन अधिकारियों के बयान, दस्तावेज और तकनीकी तथ्यों की जांच की जाएगी. बाकी इंजीनियरों पर फिलहाल किसी प्रकार की विभागीय जांच नहीं बैठाई गई है.
दरअसल भोपाल में बने इस रेलवे ओवरब्रिज की डिजाइन को लेकर उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया था, जब पुल का एक हिस्सा लगभग 90 डिग्री एंगल पर मुड़ता दिखाई दिया. सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हुए थे. लोगों ने इसे इंजीनियरिंग की बड़ी चूक बताते हुए सरकार और लोक निर्माण विभाग की जमकर आलोचना की थी. विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरा था और इसे जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ बताया था.
विवाद के बाद CM  ने दिए थे जांच के आदेश
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सात इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया था. साथ ही पुल की डिजाइन, निर्माण प्रक्रिया और तकनीकी मंजूरी की जांच के आदेश दिए गए थे. इस कार्रवाई को सरकार की सख्ती के तौर पर देखा गया था. अब इंजीनियरों की बहाली के फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है. सरकार का कहना है कि बहाली प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और विभागीय जांच पूरी निष्पक्षता से जारी रहेगी. वहीं विपक्ष इस फैसले पर सवाल उठा रहा है और इसे सरकार की “यू-टर्न राजनीति” बता रहा है.
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी ओवरब्रिज की डिजाइन में सुरक्षा और यातायात मानकों का विशेष ध्यान रखा जाता है. ऐसे में 90 डिग्री जैसे तीखे मोड़ वाला पुल शुरुआत से ही सवालों के घेरे में रहा. हालांकि विभाग का दावा है कि डिजाइन तकनीकी मानकों के अनुसार तैयार की गई थी और निर्माण में सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया. फिलहाल इस मामले में विभागीय जांच की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि पुल की डिजाइन और निर्माण में वास्तव में लापरवाही हुई थी या नहीं.
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