'मल्टीपल वॉरहेड तकनीक वाली एडवांस अग्नि मिसाइल का परीक्षण सफल', रक्षा मंत्रालय ने दी जानकारी – Jagran

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भारत ने ओडिशा तट से मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल सिस्टम से लैस उन्नत अग्नि मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया है। रक्षा मंत्रालय ने …और पढ़ें
MIRV तकनीक से लैस अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण(फोटो: एक्स/@DRDO_India)
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को पुष्टि की कि भारत ने शुक्रवार को ओडिशा तट के पास डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल सिस्टम से लैस एक उन्नत अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण किया है।
इस परीक्षण के साथ ही भारत ने एक बार फिर एक ही मिसाइल प्रणाली का उपयोग करके कई रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।
MIRV तकनीक एक ही बैलिस्टिक मिसाइल को कई परमाणु हथियारों को अलग-अलग लक्ष्यों तक ले जाने की क्षामता प्रदान करता है। यह प्रणाली दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम है और मिसाइल की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देती है।
रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, अग्नि मिसाइल का परीक्षण कई पेलोड के साथ किया गया, जिनका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में बड़े भौगोलिक क्षेत्र में फैले अलग-अलग लक्ष्यों पर सटीक वार करना था।
यह उन्नत अग्नि-5 मिसाइल का दूसरा ज्ञात परीक्षण था, जिसे मिशन दिव्यास्त्र के रूप में भी जाना जाता है। इस MIRV-सक्षम संस्करण का पहला परीक्षण मार्च 2024 में किया गया था।
परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम अग्नि-5 की आधिकारिक मारक सीमा 5,000 किलोमीटर से अधिक है। इसकी जद में चीन सहित लगभग पूरा एशिया, यूरोप के कुछ हिस्से और अफ्रीका के क्षेत्र आते हैं।
इस सफल उड़ान परीक्षण पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), भारतीय सेना और उद्योग जगत को बधाई देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह परीक्षण बढ़ते खतरों के बीच देश की रक्षा तैयारियों में एक अविश्वसनीय क्षमता जोड़ देगा।
मिसाइल के उड़ान परीक्षण की निगरानी जमीन और जहाज आधारित कई स्टेशनों द्वारा की गई। इन प्रणालियों ने मिसाइल के लॉन्च होने से लेकर हिंद महासागर में पेलोड के गिरने तक पूरे प्रक्षेपवक्र पर नजर रखी। मंत्रालय ने पुष्टि की है कि उड़ान के आंकड़ों के अनुसार मिशन के सभी उद्देश्य सफलतापूर्वक पूरे हुए हैं।
इस अत्याधुनिक मिसाइल को डीआरडीओ (DRDO) की प्रयोगशालाओं ने देश भर के विभिन्न उद्योगों के सहयोग से विकसित किया है। परीक्षण के दौरान डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक और भारतीय सेना के जवान मौजूद थे।
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