पारिवारिक विवाद और कोर्ट-कचहरी के मामलों से टूट चुके एक युवा इंजीनियर ने गोरखपुर के कुसम्ही जंगल में पेड़ से लटककर अपनी जान दे दी. मृतक की पहचान कुशीनगर जिले के कसया थानाक्षेत्र स्थित वेलवा पलकधारी गांव निवासी प्रद्युम्न कुमार यादव (33) के रूप में हुई है. प्रद्युम्न मध्य प्रदेश की एक निजी कंपनी में इंजीनियर के पद पर कार्यरत था.
हैरान करने वाली बात यह है कि आत्महत्या करने से ठीक पहले प्रद्युम्न ने 1.46 मिनट का एक भावुक वीडियो रिकॉर्ड किया. इस वीडियो में उसने अपनी पत्नी पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी मौत की वजह बताई है.
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वायरल हो रहे सुसाइड वीडियो में प्रद्युम्न अपना दर्द बयां करते हुए कहता है, “मेरे मरने का समय नहीं है, पर पत्नी के अत्याचार से जीने की इच्छा भी नहीं बची है. मुझे कोई यह न कहे कि मैं बेसमय मर गया. बड़े भाई, मां-बाप को एहसास न होने देना कि उनका एक बेटा नहीं है. हर मां-बाप की उम्मीद होती है कि बेटा बुढ़ापे का सहारा बने, लेकिन पत्नी के दिए दु:ख के आगे मैं उनका दु:ख भूल गया.”
वीडियो में उसने वह फंदा भी दिखाया जिससे लटककर उसने अपनी जीवनलीला समाप्त की और कहा कि अब यही उसका आखिरी सहारा है. जब प्रद्युम्न के परिचितों ने सोशल मीडिया पर यह वीडियो देखा, तो उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी.
गुरुवार, 14 मई की देर शाम गोरखपुर के एम्स थाना क्षेत्र के अंतर्गत कुसम्ही जंगल में बुढ़िया माता मंदिर के पास नाला पार एक पेड़ पर गमछे के सहारे प्रद्युम्न का शव लटकता हुआ मिला. सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की गहनता से जांच शुरू कर दी है.
जानकारी के मुताबिक, प्रद्युम्न की शादी 2 जून 2017 को कुशीनगर के तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के सोहाग गांव की रहने वाली अर्पिता यादव से हुई थी. शादी के बाद कुछ महीने पत्नी ससुराल में रही और फिर पति के साथ हरियाणा चली गई. दोनों की पांच साल की एक बेटी भी है, जो फिलहाल मां के साथ रहती है.
वर्ष 2020 में दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया और मामला न्यायालय पहुंच गया. प्रद्युम्न की पत्नी अर्पिता ने उस पर दहेज उत्पीड़न और भरण-पोषण का मुकदमा दर्ज करा दिया. यह केस पडरौना के पारिवारिक न्यायालय में विचाराधीन है.
परिजनों के अनुसार, इस मामले में 12 मई को सुनवाई होनी थी, लेकिन उस दिन फैसला नहीं हो पाया और अगली तारीख 21 जुलाई की लग गई. मध्य प्रदेश में नौकरी करने वाले प्रद्युम्न को बार-बार छुट्टी लेकर कुशीनगर आने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था. पत्नी द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमों और कोर्ट की लंबी प्रक्रिया ने उसे गहरे अवसाद (डिप्रेशन) में धकेल दिया था, जिसके चलते उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया.
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Source: IOCL
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