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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के दो दिवसीय दौरे से लौटने के बाद एक बार फिर अपने खास अंदाज में नजर आए. उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई बैठक को नया नाम देते हुए “G-2” बताया और कहा कि यह इतिहास का बेहद अहम मोमेंट साबित हो सकता है.
चीन से लौटने के बाद फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “ये दुनिया के दो महान देशों की बैठक थी. मैं इसे G-2 कहता हूं. मुझे लगता है कि इतिहास में इसे बहुत अहम पल के तौर पर याद किया जाएगा.”
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ट्रंप शुक्रवार शाम अमेरिका के मैरीलैंड स्थित जॉइंट बेस एंड्रयूज पहुंचे. वापसी के दौरान उन्होंने अलास्का के एंकरेज में भी थोड़ा समय बिताया. अमेरिका लौटते ही उन्होंने दावा किया कि चीन के साथ उनकी बातचीत बेहद सफल रही और कई बड़े व्यापारिक समझौते हुए.
चीन खरीदेगा 200 बोइंग जेट
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि चीन ने अमेरिकी कंपनी बोइंग से 200 विमान खरीदने पर सहमति जताई है, जबकि भविष्य में 750 और विमान खरीदने का वादा भी किया गया है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि इस समझौते से अमेरिकी कृषि सेक्टर को भी बड़ा फायदा मिलेगा.
ताइवान के चीन के संभावित टेकओवर पर क्या बोले ट्रंप?
ट्रंप ने ताइवान मुद्दे पर भी बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि चीन फिलहाल ताइवान को लेकर कोई आक्रामक कदम नहीं उठाएगा, कम से कम तब तक जब तक वह राष्ट्रपति पद पर हैं. ट्रंप ने कहा, “वे इसे टेकओवर नहीं मानते. वे सिर्फ यह नहीं चाहते कि ताइवान खुद को पूरी तरह स्वतंत्र घोषित करे.”
ट्रंप ने आगे कहा, “मुझे नहीं लगता कि जब तक मैं यहां हूं, चीन कुछ करेगा. लेकिन मेरे बाद क्या होगा, यह कहना मुश्किल है.” ट्रंप ने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि चीन शांत रहे और किसी युद्ध की स्थिति न बने.
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शी जिनपिंग से मुलाकात को ट्रंप ने बताया ‘G-2’
इस बीच अमेरिकी मीडिया में ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात को लेकर काफी चर्चा हो रही है. द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रंप के “G-2” यानी दो महान देश वाले बयान ने चीन को अमेरिका के बराबर वैश्विक ताकत के तौर पर पेश किया, जो लंबे समय से शी जिनपिंग की रणनीति का हिस्सा माना जाता रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच हुई मुलाकात में जिस तरह दोस्ती, सम्मान और साझेदारी का प्रदर्शन हुआ, उसने दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों के रिश्तों को नया संदेश दिया है. ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने शी जिनपिंग को सितंबर में वॉशिंगटन आने का न्योता दिया है. माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, ताइवान और पश्चिम एशिया के मुद्दों पर और बड़े संवाद देखने को मिल सकते हैं.
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