भारत के लिए अप्रैल का महीना आर्थिक मोर्चे पर थोड़ी चिंता लेकर आया। देश का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट (Merchandise Trade Deficit) पिछले महीने के मुकाबले **37%** बढ़कर **$28.38 अरब** पर पहुंच गया। इसकी मुख्य वजह कच्चे तेल (Crude Oil) और सोने (Gold) के आयात में हुई भारी बढ़ोतरी रही।
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अप्रैल में भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट $28.38 अरब रहा, जो पिछले महीने के $20.6 अरब से काफी ज्यादा है। यह भारी बढ़ोतरी खास तौर पर जरूरी आयात (Essential Imports) में इजाफे के कारण हुई। कच्चे तेल का आयात बढ़कर $18.62 अरब हो गया, जो पिछले महीने $12.18 अरब था। यह बढ़ोतरी वेस्ट एशिया (West Asia) में चल रहे संघर्षों के चलते कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का नतीजा है। वहीं, सोने का आयात भी दोगुना से ज्यादा बढ़कर $5.63 अरब पर पहुंच गया, जबकि मार्च में यह $3.06 अरब था। माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल और इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से पहले मांग बढ़ने की वजह से ऐसा हुआ।
बढ़ते ट्रेड डेफिसिट का सीधा असर भारतीय रुपये (Indian Rupee) पर दिखा है। डॉलर के मुकाबले रुपया 96 के स्तर को पार कर गया, जो कि एक रिकॉर्ड लो है। 2024 में रुपया एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली करेंसी में से एक बन गया है। वेस्ट एशिया में जारी तनाव और हॉरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में रुकावट की आशंका ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और करेंसी पर दबाव बढ़ा दिया है।
हालांकि, मुश्किलों के बावजूद, अप्रैल में भारत के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट (Merchandise Exports) में अच्छी बढ़त देखी गई। यह $43.56 अरब तक पहुंच गया। इलेक्ट्रॉनिक गुड्स, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे सेक्टर्स ने इसमें अहम योगदान दिया। सर्विसेज एक्सपोर्ट (Services Exports) भी 13.36% की ग्रोथ के साथ $37.24 अरब पर रहा। लेकिन, मर्चेंडाइज इंपोर्ट (Merchandise Imports) में हुई जबरदस्त बढ़ोतरी ने इन सकारात्मक आंकड़ों पर पानी फेर दिया। इंपोर्ट 71.94 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में 10% ज्यादा है।
अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि मौजूदा फाइनेंशियल ईयर (FY27) में करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit – CAD) बढ़कर GDP का 1.5% से 2.4% तक पहुंच सकता है, जो पिछले साल से काफी ज्यादा है। अप्रैल में कच्चे तेल की कीमतें $114 प्रति बैरल के पार थीं, और वेस्ट एशिया से आने वाले रेमिटेंस (Remittances) में संभावित रुकावटें भी इस अनुमान का हिस्सा हैं। Morgan Stanley और World Bank जैसी संस्थाएं FY27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ 6.5% से 6.7% के बीच रहने का अनुमान लगा रही हैं। वहीं, महंगाई (Inflation) भी थोड़ी ऊंची रह सकती है, जिसका औसत FY27 में 4.8% से 5.6% के बीच रहने की उम्मीद है।
भारत की सबसे बड़ी कमजोरी एनर्जी इंपोर्ट पर भारी निर्भरता है। करीब 50% कच्चा तेल वेस्ट एशिया से आता है और हॉरमुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ऐसे में किसी भी तरह की लंबी रुकावट से सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और पूरी इकोनॉमी में लागत बढ़ सकती है। सरकार ने सोने और चांदी के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी है, जो 13 मई से लागू होगी। इसका मकसद डॉलर की निकासी को रोकना और रुपये को सहारा देना है, हालांकि इसका लॉन्ग-टर्म असर देखना बाकी है। इसके अलावा, वेस्ट एशिया से आने वाले रेमिटेंस, जो विदेशी मुद्रा का एक अहम जरिया हैं, उनमें रुकावट का खतरा भी बना हुआ है। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब अप्रैल में इंपोर्ट में महीने-दर-महीने बढ़ोतरी, एक्सपोर्ट की बढ़ोतरी से लगभग दोगुनी रही, जो साफ दिखाता है कि इंपोर्ट का दबाव अभी बना हुआ है।
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