हाई कोर्ट के फैसले के बाद मां वाग्देवी की तस्वीर लेकर भोजशाला पहुंचे लोग, पुलिस ने रोका – AajTak

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मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. शुक्रवार को हाई कोर्ट ने भोजशाला को मंदिर करार दिया था. जिसके बाद शनिवार को हिंदू पक्ष के लोग मां वाग्देवी (सरस्वती) की एक फोटो लेकर भोजशाला परिसर के अंदर जाने लगे. 
इस दौरान उन्होंने मां वाग्देवी के साथ भगवान हनुमान की फोटो भी अंदर ले जाने की कोशिश की. हालांकि, मेन गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मचारियों और पुलिस ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया.
भोजशाला के गेट पर हिंदू पक्ष और पुलिस अधिकारियों के बीच काफी देर तक बातचीत और बहस हुई. पुलिस ने साफ कहा कि सोमवार के बाद ही इस मामले पर कोई फैसला लिया जाएगा. 
पुलिस ने बताया कि जब तक भोजशाला कोई साफ आदेश नहीं आता, तब तक फोटो को अंदर ले जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती. पुलिस की समझाने के बाद हिंदू पक्ष के लोग वहां से वापस लौट गए.
हाई कोर्ट ने बताया हिंदू मंदिर
बता दें कि शुक्रवार को हाई कोर्ट ने हिंदू पक्ष की याचिका पर सुनवाई करते हुए एक बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने अपने आदेश में भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर बताया है. इस फैसले के बाद मीडिया की टीम ने भोजशाला के अंदर जाकर जायजा लिया, जहां कई ऐसे प्राचीन चिन्ह और आकृतियां मिली हैं, जिन्हें हिंदू पक्ष हमेशा से अपने दावों का मजबूत आधार बताता रहा है.
क्या है पूरा मामला?
भोजशाला को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है. हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा है कि ये कमाल मौला मस्जिद है. भोजशाला परिसर में कुल 104 प्राचीन खंभे मौजूद हैं. इन खंभों और दीवारों पर सनातन धर्म के कई प्रतीक साफ तौर पर देखे जा सकते हैं. 
खंभों पर भगवान गणेश की आकृति, घंटियां और रिद्धि-सिद्धि के पारंपरिक चिन्ह उकेरे गए हैं. इसकी नक्काशी पूरी तरह से मंदिर वास्तुकला की शैली से मेल खाती है. इसके अलावा, दीवारों पर ‘ओम नमः शिवाय’ और ‘ओम सरस्वती नमः’ जैसे धार्मिक शब्द भी लिखे हुए हैं. परिसर की छत पर कमल के फूल की आकृति भी बनी हुई है.
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भी अपनी पिछली रिपोर्ट में इन सभी प्रतीकों का जिक्र किया था. बताया जाता है कि पहले इन चिन्हों को चूने की परत से ढक दिया गया था, जो बाद में सफाई के दौरान दोबारा सामने आए.
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