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” बीता हुआ कल जा चुका है. आने वाला कल अभी आया नहीं है. हमारे पास केवल आज है. आइए शुरुआत करें.” — मदर टेरेसा
यह विचार जीवन का सबसे व्यावहारिक और कड़वा सच हमारे सामने रखता है. मनुष्य का पूरा जीवन तीन कालों के ताने-बाने में बुना है , अतीत, भविष्य और वर्तमान. लेकिन विडंबना यह है कि हम अपना सबसे ज़्यादा समय उस काल को सोचने में गंवा देते हैं जिस पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है.
बीता हुआ कल (अतीत): यह समय की वह किताब है, जिसका पन्ना अब पलटा नहीं जा सकता. अतीत में हमसे जो गलतियां हुईं, जो नुकसान हुआ या जो असफलताएं मिलीं, वे केवल अनुभव के रूप में हमारे काम आ सकती हैं. उन पर लगातार शोक मनाना या काश ऐसा होता की ग्रंथि में बंधे रहना अपनी आज की ऊर्जा को व्यर्थ करना है. जो जा चुका है, वह वापस नहीं आ सकता.
आने वाला कल (भविष्य): यह केवल संभावनाओं का गर्भ है. भविष्य की अत्यधिक चिंता, योजनाएं और अनजाना डर इंसान को मानसिक रूप से थका देता है. हम कल की सुरक्षा के चक्कर में अक्सर आज की शांति की बलि चढ़ा देते हैं. जबकि सच यह है कि एक बेहतर भविष्य का निर्माण केवल एक बेहतर आज के जरिए ही संभव है.
हमारे पास केवल आज है (वर्तमान): वर्तमान ही वह एकमात्र सिक्का है जिसे हम वास्तव में खर्च कर सकते हैं. यही वह क्षण है जहाँ हम सांस ले रहे हैं, सोच सकते हैं, निर्णय ले सकते हैं और कर्म कर सकते हैं. जीवन की हर बड़ी सफलता, हर बड़ा बदलाव इसी आज की कोख से जनमता है.
“आइए शुरुआत करें”—ये तीन शब्द एक नए संकल्प की गूंज हैं. यह हमें याद दिलाते हैं कि शुरुआत करने के लिए किसी सही समय या कल का इंतजार करना आत्मघाती है. चाहे कोई नया करियर हो, छूटा हुआ लक्ष्य हो, बिगड़ा हुआ रिश्ता हो या आत्म-सुधार की यात्रा—उसकी नींव इसी पल रखनी होगी. इतिहास गवाह है कि जिन्होंने आज को पहचान लिया, समय ने उनके कल को अपने आप संवार दिया.
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