क्या अमेरिका और इसराइल फिर से कर रहे हैं ईरान पर हमले की तैयारी? – BBC

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ईरान के कुछ अधिकारियों ने अमेरिका और खाड़ी के देशों को दोबारा युद्ध शुरू होने की आशंका के मद्देनज़र चेतावनी दी है.
इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार मोहम्मद मोखबर ने बीते दिनों खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हुए ईरानी हमलों का ज़िक्र कर कहा है कि "हालिया युद्ध में सेंटकॉम (अमेरिकी सेंट्रल कमांड) के किराए के ठिकानों पर हमारा जवाबी हमला बेहद संयमित था लेकिन यह संयम हमेशा के लिए नहीं रहेगा."
उन्होंने आगे कहा कि "ईरान ने सालों तक इन देशों को दोस्त और भाई की तरह देखा, लेकिन उन्होंने अपनी स्वतंत्रता को पहले ही बेचकर अपने देश और घरों को फ़लस्तीन और ईरान के दुश्मनों के हवाले कर दिया."
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिवालय से जुड़े मीडिया आउटलेट नूरन्यूज़ ने एक अज्ञात वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के हवाले से चेतावनी दी है कि अगर ईरान पर दोबारा हमला होता है तो "वे लक्ष्य, जिन्हें 40 दिन के युद्ध के दौरान कुछ कारणों से निशाना नहीं बनाया गया था, इस बार प्राथमिक ऑपरेशनल सूची में होंगे."
इससे पहले 'न्यूयॉर्क टाइम्स' ने मध्य पूर्व के दो अज्ञात अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि अमेरिका और इसराइल ईरान पर फिर से हमले की संभावना पर विचार कर रहे हैं और इसके लिए तैयारी कर रहे हैं.
ये हमले अगले हफ़्ते तक शुरू हो सकते हैं.
इन दो अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर 'न्यूयॉर्क टाइम्स' से बात की. अमेरिका और इसराइल की ये तैयारियां युद्धविराम के बाद से अब तक की सबसे व्यापक सैन्य तैयारियां हैं.
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने इस हफ़्ते अमेरिकी कांग्रेस के सांसदों को बताया कि पेंटागन के पास विभिन्न परिस्थितियों के लिए योजनाएं मौजूद हैं- जिनमें ज़रूरत पड़ने पर युद्ध को फिर शुरू करना और क्षेत्र से सेना को कम करना या वापस बुलाना भी शामिल है.
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'न्यूयॉर्क टाइम्स' ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि अगर डोनाल्ड ट्रंप हमला करने का फैसला लेते हैं, तो एक विकल्प ईरान के सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे पर भारी बमबारी है, जबकि दूसरा विकल्प एक ज़मीनी अभियान है जिसमें ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार को हटाने की कोशिश की जाएगी.
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माना जाता है कि ये भंडार 12 दिन के युद्ध के दौरान परमाणु ठिकानों पर हुई बमबारी के बाद मलबे के नीचे दबे हुए हैं.
अमेरिका और इसराइल की संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर अटकलें तब और बढ़ गईं जब डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चीन यात्रा और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बावजूद ईरान युद्ध और होर्मुज़ स्ट्रेट पर कोई ठोस नतीजा नहीं निकला.
मंगलवार को चीन रवाना होने से पहले ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को चेतावनी दी कि उसे अमेरिका के साथ समझौता करना ही होगा वरना उसे 'नष्ट' कर दिया जाएगा.
सोमवार को उन्होंने ईरान के साथ हुए युद्धविराम को बहुत नाज़ुक बताया.
इन बयानों के बाद ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ ने कहा कि ईरानी सशस्त्र बल "दूसरे पक्ष की आक्रामकता" का जवाब देने के लिए तैयार हैं.
उन्होंने एक्स पर लिखा, "गलत रणनीति और गलत फैसलों के हमेशा गलत नतीजे होते हैं. हम हर विकल्प के लिए तैयार हैं. हम उन्हें हैरान कर देंगे."
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इस बीच ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए ने बताया है कि पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नक़वी "बिना पूर्व सूचना के" तेहरान पहुँचे हैं.
बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़ आईआरएनए ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया है कि मोहसिन नक़वी कुछ घंटे पहले तेहरान पहुंचे हैं और वे ईरान के कुछ अधिकारियों से मिलने वाले हैं.
ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा युद्धविराम में पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहा है और उसने एक बार शांति वार्ता के लिए वरिष्ठ ईरानी और अमेरिकी अधिकारियों की मेजबानी भी की थी.
हालाँकि यह शांति वार्ता अब तक किसी नतीजे तक नहीं पहुंच पाई है.
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते मतभेदों के कारण इन वार्ताओं का दूसरा दौर आयोजित नहीं किया जा सका.
पाकिस्तान के गृह मंत्री ने एक महीने पहले ईरान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ ईरान की यात्रा की थी.
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वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.
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ईरानी सरकारी टेलीविजन ने बताया है कि यूरोपीय देश होर्मुज़ स्ट्रेट से अपने जहाज़ों को गुज़रने की अनुमति देने के संबंध में ईरान के साथ बातचीत कर रहे हैं.
बीबीसी फ़ारसी सेवा के मुताबिक़, ईरान टेलीविजन न्यूज़ नेटवर्क और ईरानी ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन ने यह ख़बर दी है.
इसमें यूरोपीय देशों के नाम लिए बिना कहा गया है, "पूर्वी एशियाई देशों, ख़ास तौर पर चीन, जापान और पाकिस्तान से जहाज़ों के गुज़रने के बाद, आज हमें जानकारी मिली है कि यूरोपीय देशों ने भी अपने जहाज़ों के लिए होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने की अनुमति पाने के लिए रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना के साथ बातचीत शुरू कर दी है."
ईरान ने 28 फरवरी को अमेरिका और इसराइल के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को लगभग बंद कर दिया है.
इस जलमार्ग पर ईरान के नियंत्रण ने दुनिया भर के तेल और गैस के बाज़ार पर गहरा असर डाला है.
आम दिनों में तेल और एलएनजी के वैश्विक निर्यात का लगभग पांचवां हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुज़रता रहा है. इसके साथ ही कई अन्य ज़रूरी वस्तुएं भी होर्मुज़ स्ट्रेट से होकर गुज़रती हैं.
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