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बिहार में पुलिस एनकाउंटर को लेकर सियासत तेज हो गई है. सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य में पुलिस एनकाउंटर की संख्या तेजी से बढ़ी है. पिछले पांच हफ्तों में पटना, सीवान, भागलपुर, नवादा और समस्तीपुर समेत कई जिलों में करीब 11 एनकाउंटर हुए हैं. इनमें दो आरोपियों की मौत हुई, जबकि 9 आरोपी पुलिस फायरिंग में घायल हुए.
बिहार पुलिस इन कार्रवाइयों को अनौपचारिक रूप से हाफ एनकाउंटर या ऑपरेशन लंगड़ा कह रही है, जिसमें अपराधियों को पैर में गोली मारकर गिरफ्तार किया जाता है. अब ये एनकाउंटर राज्य में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गए हैं. आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि पुलिस एनकाउंटर में एक खास जाति के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने इशारों में कहा कि यादव समुदाय के लोगों पर ज्यादा कार्रवाई हो रही है.
तेजस्वी यादव के आरोपों पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तंज भरे अंदाज में जवाब दिया. उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग कह रहे हैं कि पुलिस पहले जाति पूछे, फिर एनकाउंटर करे. मैं पुलिसवालों से कहूंगा कि पहले जाति पूछ लीजिए, उसके बाद गोली चलाइए. यह कैसी सोच है?’ सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार को सुशासन और मजबूत कानून-व्यवस्था के लिए जाना जाना चाहिए.
उन्होंने पुलिस को निर्देश दिया है कि अगर कोई अपराधी पुलिस को चुनौती देता है, तो 48 घंटे के भीतर कार्रवाई होनी चाहिए. इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी भी बहस में कूद पड़े. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अपराधियों की कोई जाति नहीं होती, लेकिन उन्होंने आरजेडी से सवाल पूछा कि बिहार की जेलों में एक खास जाति के कैदियों की संख्या ज्यादा क्यों है?
उन्होंने यह भी पूछा कि जमीन विवाद, अत्याचार और दलित व वक्फ जमीन कब्जे के मामलों में एक ही जाति का नाम बार-बार क्यों आता है. मांझी ने कहा, ‘अगर आप हमला करें तो वह राजनीति है, लेकिन हम जवाब दें तो चरित्र पर सवाल उठता है? दलित अब डरने वाले नहीं हैं, जवाब दिया जाएगा.’ मुख्यमंत्री बनने के बाद जिन दो अपराधियों की एनकाउंटर में मौत हुई, उनमें भागलपुर के सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी हत्या मामले का आरोपी रामधनी यादव और सीवान में बीजेपी के पूर्व एमएलसी मनोज कुमार सिंह के भतीजे की हत्या के आरोपी सोनू यादव शामिल हैं.
इसके अलावा पटना, नवादा, सीवान और समस्तीपुर में हुए अन्य हाफ एनकाउंटर में घायल आरोपियों में भी कई यादव समुदाय से बताए जा रहे हैं, जबकि कुछ आरोपी राजपूत और वैश्य समुदाय से भी हैं. विपक्ष का दावा है कि अब तक हुए 11 बड़े एनकाउंटर में छह आरोपी यादव समुदाय से हैं, जबकि पांच अन्य गैर-यादव जातियों से आते हैं. हालांकि बिहार सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पुलिस कार्रवाई केवल अपराधियों के खिलाफ हो रही है, जाति के आधार पर नहीं. पुलिस मुठभेड़ों को लेकर छिड़ी यह बहस अब बिहार की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन चुकी है.
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