2026 तक भारत में ईंधन की मांग में भारी गिरावट संभव, पेट्रोल की खपत पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर – Jagran

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सरकार की ईंधन बचत मुहिम, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रुपये की कमजोरी के चलते भारत में 2026 की दूसरी छमाही तक परिवहन ईंधन की मांग में 40% तक की गिरावट …और पढ़ें
2026 तक भारत में ईंधन की मांग में भारी गिरावट संभव।
2026 तक परिवहन ईंधन मांग में 40% तक की कमी।
पेट्रोल की मांग पर सबसे अधिक असर पड़ने की संभावना।
सरकार की प्राथमिकता आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सरकार की ईंधन बचत मुहिम, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रुपये की कमजोरी से भारत में वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में परिवहन ईंधन की मांग 40 प्रतिशत तक घट सकती है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 15 मई से तीन चरणों में करीब पांच रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच पेट्रोलियम कंपनियों ने इसका कुछ बोझ उपभोक्ताओं पर डाला है। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों और सरकारी विभागों से ईंधन बचाने, ‘वर्क फ्रॉम होम’ को बढ़ावा देने और गैर-जरूरी यात्राएं कम करने की अपील की है।
सरकार को आशंका है कि महंगे ऊर्जा आयात से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है और चालू खाते का घाटा (कैड) में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
ऊर्जा विश्लेषण कंपनी केप्लर की प्रमुख विश्लेषक एलिफ बिनीची की रिपोर्ट में भारत की 2026 के लिए परिष्कृत उत्पादों की मांग वृद्धि का अनुमान 39 प्रतिशत घटाकर करीब 78 हजार बैरल प्रतिदिन (केबीडी) कर दिया गया है। इससे पहले यह अनुमान 128 किलोलीटर बैरल प्रतिदिन (केबीडी) था।
रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल की मांग पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की संभावना है। पेट्रोल की मांग वृद्धि का अनुमान 63 केबीडी से घटाकर 38 केबीडी प्रतिदिन कर दिया गया है। अब पेट्रोल की खपत लगभग 1,010 केबीडी प्रतिदिन रहने का अनुमान है, जो पहले 1,035 केबीपीडी आंका गया था।
रिपोर्ट में कहा गया कि दफ्तर आने-जाने की गतिविधियों में कमी, गैर-जरूरी यात्राओं में गिरावट और ईंधन बचत अभियान के कारण पेट्रोल की मांग कमजोर पड़ सकती है। वहीं डीजल की वार्षिक मांग वृद्धि का अनुमान भी करीब 20 केबीडी घटाया गया है।
हवाई यात्रा पर असर पड़ने की आशंका के चलते विमान ईंधन (एटीएफ) की मांग वृद्धि का अनुमान भी लगभग 50 प्रतिशत घटाकर छह केबीडी कर दिया गया है, जो पहले 11 केबीडी था।
रिपोर्ट में कहा गया कि हालिया सरकारी कदमों से संकेत मिलता है कि नीति-निर्माता अब तेज ईंधन मांग वृद्धि के बजाय आर्थिक स्थिरता, महंगाई नियंत्रण, विदेशी मुद्रा संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट नहीं आती, रुपया स्थिर नहीं होता या सरकार अतिरिक्त राहत उपाय नहीं लाती, तो आने वाले महीनों में ईंधन कीमतों में और बढ़ोतरी तथा अतिरिक्त बचत उपाय लागू करना मुश्किल से टाला जा सकेगा।
भारतीयों का विदेश यात्रा पर खर्च मार्च में घटकर 1.09 अरब डॉलर रह गया, जो फरवरी में 1.30 अरब डॉलर था। जनवरी में विदेश यात्रा पर खर्च 1.65 अरब डॉलर रहा था।
‘उदारीकृत धन प्रेषण योजना’ (एलआरएस) के तहत आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, भारतीयों द्वारा विभिन्न श्रेणियों में विदेश में भेजा गया कुल धन (रेमिटेंस) मार्च में 2.59 अरब डॉलर रहा, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा यात्रा व्यय का रहा।
एलआरएस के तहत निवासी व्यक्ति एक वित्त वर्ष में 2.50 लाख डॉलर तक का प्रेषण किसी भी वैध चालू या पूंजी खाते के लेनदेन के लिए कर सकते हैं।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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