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गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) पर्यटकों से गुलजार हो गया है, जहाँ स्कूली बच्चे और परिवार वन्यजीवों को देखने पहुँच रहे हैं …और पढ़ें
भारी भीड़ के कारण वीटीआर में ठहरने के इंतजाम (आवासन) भी कम पड़ने लगे हैं। फाइल फोटो
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, बेतिया (पश्चिम चंपारण)। Valmiki Tiger Reserve: स्कूलों में ग्रीष्मावकाश (गर्मी की छुट्टी) शुरू होते ही बिहार का एकमात्र वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) पर्यटकों से पूरी तरह गुलजार हो उठा है।
बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे अपने माता-पिता और अभिभावकों के साथ जंगल की सैर और वन्यजीवों को देखने पहुंच रहे हैं। पर्यटकों की इस भारी भीड़ के कारण वीटीआर में ठहरने के इंतजाम (आवासन) भी कम पड़ने लगे हैं।
लगातार बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए यहां पर्यटन सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया गया है। वर्ष 2017 में तैयार किए गए इंफ्रास्ट्रक्चर को इस साल नया रूप देकर कमरों का जीर्णोद्धार किया गया है, ताकि लोगों को बेहतर माहौल मिल सके।
वर्तमान में वाल्मीकिनगर के 26 कमरों में 52 पर्यटकों के ठहरने की उत्तम व्यवस्था है। इसके अलावा कोतराहा पर्यटन केंद्र में 40 बेड का इंतजाम किया गया है।
पर्यटकों के रोमांच को दोगुना करने के लिए विशेष रूप से ‘कैनोपी झूला’ तैयार किया गया है, जहां से लोग जंगल के प्राकृतिक सौंदर्य और वनस्पतियों को करीब से निहार रहे हैं।
सबसे खास बात यह है कि हाल के दिनों में पर्यटकों को बाघों के दीदार आसानी से हो रहे हैं, जिससे इस जगह का आकर्षण और बढ़ गया है।
गोबर्द्धना में प्राकृतिक और पारंपरिक शैली में तैयार किया गया चार कमरों वाला ‘थारू सूईट’ पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। इसके प्रति लोगों का विशेष रुझान देखा जा रहा है।
दूसरी ओर, मंगुराहा पर्यटन केंद्र में भी पर्यटकों के लिए 16 कमरे, एक आधुनिक सभागार, एक ईको हट और चार टेंट हट की शानदार व्यवस्था की गई है।
वीटीआर के तीनों प्रमुख पर्यटन स्थलों को मिलाकर कुल 56 कमरों में 124 पर्यटकों के ठहरने की सरकारी व्यवस्था उपलब्ध है।
वीटीआर आने वाले सैलानियों के लिए रोमांच के कई साधन मौजूद हैं। यहां की जंगल सफारी, ईको पार्क, कौलेश्वर झूला, हाथी शेड, गोल घर, व्यू प्वाइंट और लालभितिया सनसेट प्वाइंट लोगों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं।
धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व वाले स्थलों जैसे सोफा मंदिर, नरदेवी मंदिर, वाल्मीकि आश्रम और कौलेश्वर मंदिर में भी काफी भीड़ उमड़ रही है। इसके साथ ही नेचर ट्रेल, साइकिल सफारी, वन्यजीवों पर आधारित फिल्म शो और शाम को होने वाले थारू सांस्कृतिक कार्यक्रम पर्यटकों का मन मोह रहे हैं।
बाघों के संरक्षण और सुविधाओं में सुधार का असर वीटीआर के आंकड़ों में साफ देखा जा सकता है। यहां आने वाले सैलानियों की संख्या में लगातार भारी इजाफा हो रहा है:
इन आंकड़ों से साफ है कि वीटीआर अब देश के प्रमुख ईको-टूरिज्म केंद्रों में अपनी मजबूत जगह बना चुका है।
ईको पर्यटन के तहत हम लगातार पर्यटकों के लिए सुविधाओं को बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। चूंकि अभी हमारे पास सरकारी स्तर पर आवासन की सीटें सीमित हैं, इसलिए अत्यधिक भीड़ होने पर पर्यटक दिन में जंगल सफारी का आनंद उठाने के बाद निजी कॉटेज और आसपास के होटलों में स्टे कर रहे हैं।
गोरव ओझा, क्षेत्र निदेशक, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व