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एक समय था जब बायजू रवींद्रन ने अपने कंपनी से बड़ा नाम कमाया था. बायजू की शुरुआत साल 2011 में हो गई थी लेकिन जिसके लिए वह जाना जाता था बायजू- द लर्निंग ऐप, साल 2015 में लॉन्च किया था और ये एडटेक प्लेटफॉर्म इतना पॉपुलर हुआ कि बायजू रवींद्रन रातोंरात अरबपति बन गए. उनकी सफलता यहीं पर खत्म नहीं हुई. साल 2019 में उनकी कंपनी को यूनिकॉर्न का दर्जा मिला और 2022 में इसकी वैल्यू 22 अरब डॉलर पहुंच गई.लेकिन आज के समय में इसकी वैल्यू जीरो हो गई है. अब उन्हें जेल जाना पड़ेगा. सिंगापुर की एक अदालत ने अवमानना के आरोप में उन्हें 6 महीने जेल की सजा सुनाई है और साथ ही उनपर 70,500 डॉलर यानी 67 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. ऐसे में लोगों के मन में एक सवाल उठ रहा है कि जो कंपनी बच्चों को पढ़ाने के लिए इतनी मेहनत करती थी, उसके फाउंडर कितने पढ़े-लिखे हैं.
कौन हैं बायजू रवींद्रन?
बायजू रवींद्रन का जन्म 5 जनवरी, 1980 को केरल के कन्नूर जिले के अजीकोड गांव में हुआ था. उन्होंने केरल के कन्नूर में स्थित गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया. वहीं, उनकी शुरुआती पढ़ाई केरल के एक मलयालम मीडियम स्कूल से हुई थी. बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने यूके की एक शिपिंग कंपनी में इंजीनियर के रूप में नौकरी शुरू की थी, लेकिन बाद में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और भारत आकर दो बार आईआईएम का एंट्रेस एग्जाम दिया. कॉमन एडमिशन टेस्ट (CAT) में दोनों बार उन्होंने 100 परसेंटाइल स्कोर किया. हालांकि रवींद्रन ने आईआईएम में एडमिशन न लेकर ट्यूशन पढ़ाने का फैसला किया और बाद में अपनी पत्नी के साथ मिलकर बायजू की नींव रखी.
कैसे कंगाल हो गया पहुंचा बायजू?
कोरोना काल के समय जब ऑनलाइन एजुकेशन की मांग बढ़ी तो बायजू सफलता के शिखर पर पहुंच गया. कंपनी की वैल्यू 22 अरब डॉलर यानी की करीब 1.98 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई. लेकिन जैसे ही लॉकडाउन खत्म हुआ, सारी चीजें नॉर्मल हुई तो, इसकी स्थिति डमाडोल हो गई. फंडिंग कम हो गई, लागत बढ़ गई और निवेशकों ने भी हाथ पीछे खींचने शुरू कर दिए.
इतना हुआ ही था कि इस बीच प्रवर्तन निदेशालय ने भी कंपनी के कई दफ्तरों पर छापे मारे. इसके बाद साल 2023 में बायजू के कई डायरेक्टर्स ने इस्तीफा दे दिया, जिससे कंपनी की हालत दिन पर दिन और खराब हो गई. फिर आया छंटनी का दौर. साल 2024 में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की भी छंटनी हुई. जहां साल 2022 में कर्मचारियों की संख्या 60 हजार थी, वहीं 2024 में ये घटकर 14 हजार पर आ गई. फिर धीरे-धीरे कंपनी की हालत खराब होते गई.
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