राजस्थान की भजनलाल सरकार अपने ही मंत्री के एक बयान को लेकर विपक्ष के निशाने पर आ गई है. राज्य के सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक (Gautam Kumar Dak) का एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस ऑडियो में मंत्री चित्तौड़गढ़ जिले के डूंगला पुलिस थाने में तैनात पुलिसकर्मियों से नाराजगी जताते हुए कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते सुनाई दे रहे हैं. हालांकि, मंत्री ने इसे फर्जी बताते हुए अपनी आवाज होने से इनकार किया है. ऑडियो सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है. विपक्ष ने मंत्री से सार्वजनिक तौर पर माफी की मांग भी कर दी है.
जानकारी के अनुसार, मंत्री ने थाना परिसर में डूंगला थानाधिकारी शैतान सिंह, कांस्टेबल लक्ष्मीनारायण और कांस्टेबल विष्णु को बाहर बुलाकर बातचीत की. सामने आए करीब तीन मिनट के कथित ऑडियो में मंत्री की ओर से पुलिसकर्मियों के साथ तीखी और अभद्र भाषा में बातचीत किए जाने का दावा किया जा रहा है.
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वायरल ऑडियो में क्या है?
बताया जा रहा है कि यह ऑडियो किसी मामले को लेकर पुलिस की कार्रवाई से नाराजगी के दौरान हुई बातचीत का है. वायरल क्लिप में कथित तौर पर मंत्री गौतम कुमार दक पुलिसकर्मियों पर गुस्सा निकालते हुए दिखाई देते हैं. इस दौरान वह आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते सुनाई देते हैं.
17 बार हुआ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग
मंत्री ने SHO के सामने ही दोनों कांस्टेबलों को आड़े हाथों लिया. हर वाक्य के साथ अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया. कथित ऑडियो में मंत्री ने करीब 17 बार भद्दी गालियों का इस्तेमाल किया. हालांकि, India.com इस वायरल ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है.
विपक्ष ने सरकार को घेरा
ऑडियो वायरल होने के बाद विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका मिल गया है. विपक्षी नेताओं का कहना है कि अगर कोई मंत्री पुलिसकर्मियों से इस तरह बात करेगा, तो इससे सरकारी सिस्टम और कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होगा. उन्होंने मंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग भी की है.
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मंत्री ने खारिज किए आरोप
इस पूरे विवाद पर मंत्री गौतम दक ने सफाई देते हुए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि वायरल ऑडियो में सुनाई दे रही आवाज उनकी नहीं है. उन्हें राजनीतिक रूप से बदनाम करने की कोशिश की जा रही है.
BJP का दावा- मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश
वहीं, BJP समर्थकों और मंत्री के करीबी लोगों का कहना है कि ऑडियो को संदर्भ से हटाकर पेश किया जा रहा है. उनका दावा है कि मंत्री सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को लेकर नाराज थे. मामले को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है.
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
इस पूरे विवाद के बीच सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है. कुछ लोग मंत्री के रवैये की आलोचना कर रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि जनप्रतिनिधि होने के नाते अधिकारियों से जवाब मांगना गलत नहीं है.
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अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली … और पढ़ें
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