LIC share price: ग्लोबल टेंशन की वजह से एक बार फिर से भारतीय शेयर बाजार बिकवाली मोड में आ गया है। इस माहौल के बीच शुक्रवार को भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के शेयर में अचानक 50% तक की गिरावट देखी गई। बुधवार को एलआईसी के शेयर 830 रुपये पर बंद हुए थे तो शुक्रवार को कीमत 410 रुपये के स्तर पर थी। वहीं, गुरुवार को बकरीद की वजह से बाजार में ट्रेडिंग नहीं हुई थी। अब सवाल है कि एलआईसी के शेयर में आखिर एक ही दिन में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई है। आइए इसका भी गणित समझ लेते हैं।
दरअसल, सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी के 1:1 बोनस इश्यू एडजस्ट होने की वजह से यह शेयर अब पहले के मुकाबले 50 पर्सेंट से ज्यादा सस्ता हो गया है। बता दें कि अप्रैल के महीने में LIC ने एक प्लान को मंजूरी दी थी, जिसके तहत रिकॉर्ड डेट तक हर योग्य शेयरहोल्डर के पास मौजूद 10 रुपये के हर पूरी तरह से पेड-अप इक्विटी शेयर के बदले, 10 रुपये का एक और पूरी तरह से पेड-अप इक्विटी शेयर जारी किया जाएगा। कंपनी ने बताया था कि वह 31 दिसंबर, 2025 तक उपलब्ध अपने रिजर्व और सरप्लस (जो लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये था) में से 6,325 करोड़ रुपये तक की पूंजी का इस्तेमाल करके बोनस शेयर जारी करेगी।
कंपनी ने अपने 1:1 बोनस इश्यू के लिए 29 मई (शुक्रवार) को रिकॉर्ड डेट तय की थी। बता दें कि यह LIC का अपने 21 लाख से ज्यादा शेयरहोल्डर्स के लिए पहला बोनस इश्यू है। मई 2022 में शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद से इस सरकारी बीमा कंपनी ने अब तक 5 अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है।
सिर्फ वही शेयरहोल्डर बोनस शेयर पाने के योग्य होंगे, जिनके डीमैट अकाउंट में शुक्रवार तक LIC के शेयर मौजूद होंगे। सेबी के T+1 सेटलमेंट नियम के कारण, निवेशकों को कंपनी के शेयर रिकॉर्ड डेट से कम से कम एक ट्रेडिंग दिन पहले खरीदने होंगे ताकि यह पक्का हो सके कि उस तारीख तक शेयर उनके डीमैट अकाउंट में जमा हो जाएं और इस तरह वे कॉर्पोरेट एक्शन के लिए योग्य हो सकें। बता दें कि 28 मई (गुरुवार) को बकरी ईद के कारण बाजार बंद थे। ऐसे में LIC के शेयर खरीदने की असल में आखिरी तारीख 27 मई (बुधवार) थी।
बोनस इश्यू में कंपनी अपने रिजर्व में से फ्री शेयर बांटती है। इसे आमतौर पर कंपनी की मजबूत वित्तीय सेहत और विकास की संभावनाओं का संकेत माना जाता है। बोनस शेयर जारी करने से कुल बकाया शेयरों की संख्या तो बढ़ जाती है लेकिन इससे कंपनी के मार्केट कैपिटलाइजेशन में कोई बदलाव नहीं आता है। इससे शेयरों की लिक्विडिटी और खरीदने की क्षमता बेहतर हो सकती है।
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