Published By: Gargi Santosh | Updated: May 29, 2026, 10:37 PM
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (IISS) की नई रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका, चीन और भारत अब भविष्य में होने वाले युद्धों को ध्यान में रखते हुए अपनी सैन्य ताकत तेजी से बढ़ा रहे हैं.
एशिया-पैसिफिक इलाके में तनाव बढ़ने की संभावना को देखते हुए तीनों ही देशों ने Military Doctrines तेजी से बदल रही. बता दें Military Doctrines यह तय करती है कि कोई देश युद्ध को किस नजरिए से देखता है और उसकी सेना मैदान में किस तरीके से लड़ाई लड़ने की तैयारी करती है.
रिपोर्ट कहती है कि अब केवल यह समझना काफी नहीं कि युद्ध क्यों शुरू होते हैं. असली चिंता यह है कि भविष्य में युद्ध कैसे लड़े जाएंगे. इसी वजह से परिचालनात्मक अवधारणाएं और सैन्य सिद्धांत अब सबसे अहम माने जा रहे हैं.
भारत अब केवल सीमा रक्षा तक सीमित नहीं है. सटीक हमले, परिशुद्ध आक्रमण और सक्रिय सैन्य प्रतिक्रिया जैसी रणनीतियां दिखाती हैं कि भारत अब चीन और पाकिस्तान दोनों को आगे की रणनीतिक खतरा मानकर तैयारी कर रहा है.
IISS रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन ने अब चीन को प्रतिद्वंद्वी सैन्य प्रतियोगी घोषित कर दिया है. अमेरिका को डर है कि कहीं चीन ताइवान पर इतनी तेजी से कब्जा न कर ले कि US और उसके दोस्त देश जवाब देने से पहले ही जंग हार जाएं.
अमेरिका बहु-क्षेत्रीय युद्ध पर काम कर रहा है, जहां साइबर हमले, उपग्रह, मिसाइलें, AI सिस्टम, नौसैनिक शक्ति और इलेक्ट्रॉनिक युद्धक सब मिलकर भविष्य का युद्धक्षेत्र तय करेंगे.
वहीं, चीन की PLA सेना आक्रामक ऑपरेशन की पूरी तैयारी कर रही है. बीजिंग अब AI, साइबर युद्ध, मिसाइल हमले और उपग्रह प्रणालियां के जरिए दुश्मन के पूरे परिचालन नेटवर्क को पंगु बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है. (Photo from Freepik, AI)
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