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CBSE कक्षा 12वीं के रिजल्ट में हुई गड़बड़ियों को लेकर सियासत गहरा गई है. BRS के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव (KTR) ने इसे लेकर केंद्र सरकार और सीबीएसई बोर्ड पर हमला बोला है. केटीआर ने रिजल्ट के खिलाफ लड़ रहे सभी छात्रों का समर्थन करते हुए शिक्षा मंत्री से जवाब मांगा है.
केटीआर ने कहा कि देश भर के छात्रों के इवैल्यूएशन प्रोसेस में आई गंभीर कमियों पर सवाल उठाना बेहद प्रेरणा देने वाला है. उन्होंने कहा कि जब छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हो, तो माता-पिता और छात्रों को पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग करने का पूरा हक है.
केटीआर ने खुलासा किया कि इस समय सीबीएसई मार्क्स विवाद के केंद्र में जो कंपनी है, उसका नाम ‘ग्लोबारेना’ है. उनके मुताबिक, ये वही संगठन है जो साल 2019 में तेलंगाना इंटरमीडिएट रिजल्ट विवाद के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार था.
ग्लोबारेना कंपनी पर बड़ा आरोप
केटीआर ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘ये बहुत दुख की बात है कि ग्लोबारेना नाम की जिस कंपनी ने 2019 में तेलंगाना इंटरमीडिएट के नतीजे बिगाड़े थे, उसने सिर्फ अपना नाम बदल लिया. इसके बाद उसने सीबीएसई से और भी बड़ा कॉन्ट्रैक्ट हासिल कर लिया, ताकि वो देश भर के छात्रों के भविष्य के साथ और बड़ा खिलवाड़ कर सके.’
बीआरएस सरकार के एक्शन की दिलाई याद
केटीआर ने तेलंगाना में अपनी तत्कालीन बीआरएस सरकार की तरफ से गई सख्त कार्रवाई को भी याद दिलाया. उन्होंने बताया कि 2019 के विवाद के बाद उनकी सरकार ने तुरंत और जिम्मेदारी से कदम उठाए थे. सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाई थी.
केटीआर ने कहा, ‘रिकॉर्ड के लिए बता दूं कि जब तेलंगाना में ग्लोबारेना विवाद हुआ था, तब बीआरएस सरकार ने अपनी आंखें नहीं मूंद ली थीं. हमने कमेटी बनाई, उसकी रिपोर्ट पर एक्शन लिया, जिम्मेदार अधिकारियों को हटाया और कंपनी को अदालत तक लेकर गए.’
केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मांगा जवाब
केटीआर ने आरोप लगाया कि कंपनी के इस विवादित इतिहास और तेलंगाना के कड़वे अनुभव से सीख लेने के बजाय, सीबीएसई बोर्ड ने सभी चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया. उन्होंने कहा कि ये चौंकाने वाला है कि सीबीएसई ने एक बेहद अकुशल संगठन को काम देने के लिए बार-बार अपने नियमों और प्रक्रियाओं में बदलाव किए. इन फैसलों ने आज लाखों छात्रों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है.
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इस पूरे संकट के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए केटीआर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से जवाब मांगा है. उन्होंने कहा, ‘इस पूरे संकट के लिए केंद्र सरकार को जवाब देना होगा. ‘शिक्षा मंत्री को बताना चाहिए कि ऐसे इतिहास वाली कंपनी को करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ी इतनी अहम जिम्मेदारी कैसे सौंप दी गई?’
उन्होंने आगे कहा कि देश का भविष्य एक टूटे हुए और सड़े हुए सिस्टम पर नहीं बनाया जा सकता. केंद्र सरकार और सीबीएसई तुरंत छात्रों की शिकायतों का निवारण करें, सभी गलतियों को सुधारें और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करें.
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