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मणिपुर के कांगपोकपी में अज्ञात हथियारबंद लोगों ने घात लगाकर हमला कर दिया. इस हमले में 23 साल का एक नागा ग्रामीण गोली लगने से घायल हो गया, जबकि दो लोगों को मामूली चोटें आई हैं.
इस घटना के बाद नागा और कुकी समुदायों के बीच एक बार फिर तनाव गहरा गया है. पुलिस के मुताबिक, ये घटना शनिवार सुबह करीब 10:45 बजे तागियुकी नदी के पास हुई.
ये जगह नागा-बहुल आबादी वाले कोनसाखुल गांव से लगभग दो किलोमीटर दूर है. गांव के तीन लोग वहां पानी की उस पाइपलाइन की मरम्मत करने गए थे, जिससे उनके गांव में पानी की सप्लाई होती है.
हमले में एक युवक गंभीर रूप से घायल
इस हमले में घायल हुए युवक की पहचान कछियाकलुंगबौ चवांग (23) के रूप में हुई है. उसके दाहिने हाथ की कोहनी में गोली लगी है. उसके साथ गए दो ग्रामीण, मानोनलुंगबौ अबोनमई (19) और पौनगामलकबौ मलंगमई (55) मामूली चोटें आई हैं.
पुलिस ने बताया कि लड़ाकू वर्दी पहने हथियारबंद लोगों ने पानी की पाइपलाइन ठीक कर रहे ग्रामीणों पर अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. घटना के तुरंत बाद सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे और घायल युवक को पास के अस्पताल पहुंचाया. वहां से बेहतर इलाज के लिए उसे इम्फाल के RIMS रेफर कर दिया गया.
इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं और हमलावरों को पकड़ने की कोशिशें जारी हैं.
‘कुकी नेशनल फ्रंट (प्रेसिडेंशियल)’ के कैडरों ने किया हमला!
कोनसाखुल गांव के चेयरमैन डी. एडम लियांगमई ने आरोप लगाया कि हमलावर ‘कुकी नेशनल फ्रंट (प्रेसिडेंशियल)’ के कैडर थे. ये एक कुकी हथियारबंद संगठन है, जिसने सरकार के साथ ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस’ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.
RIMS अस्पताल में मीडिया से बात करते हुए लियांगमई ने दावा किया कि उग्रवादियों ने जानबूझकर गांव की पानी की पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाया था. इसके बाद वो वहां घात लगाकर बैठ गए ताकि जो भी नागरिक सप्लाई ठीक करने आए, उस पर हमला किया जा सके.
लियांगमई ने कहा, ‘हम आम नागरिक हैं. मासूम ग्रामीणों को निशाना बनाने वाले हथियारबंद कैडरों के खिलाफ सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए.’ वहीं, इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक KNF(P) की तरफ से इन आरोपों पर कोई बयान सामने नहीं आया था.
‘बर्बर और अमानवीय कृत्य’
‘फुटहिल्स नागा कोआर्डिनेशन कमेटी’ (FNCC) ने इस घटना की निंदा की है. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले महीनों में भी ऐसे कई हमले हुए हैं, लेकिन दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. कोनसाखुल ग्राम प्राधिकरण ने एक बयान जारी कर इस हमले को ‘बर्बर और अमानवीय’ बताया. उन्होंने इसमें केएनएफ(पी) उग्रवादियों के साथ-साथ पास के लीलोन वैपेई गांव के कुछ लोगों के शामिल होने का आरोप लगाया.
ग्राम प्राधिकरण ने मई महीने में नागा नागरिकों के अपहरण के एक पुराने मामले का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि बंधक बनाए गए 6 ग्रामीण आज भी लापता हैं. प्राधिकरण ने सरकार से निवासियों की सुरक्षा, जरूरी सेवाएं बहाल करने और इस नए हमले की पूरी जांच करने की मांग की है.
नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के विधायक अवांगबौ न्यूमई ने भी इस हमले की निंदा की. उन्होंने इसे निहत्थे नागरिकों के खिलाफ हिंसा करार दिया. न्यूमई ने कहा, ‘ऐसी हिंसक हरकतें समुदायों के बीच सिर्फ डर, पीड़ा और विभाजन को गहरा करती हैं.’
उन्होंने सभी पक्षों से हिंसा का रास्ता छोड़ने और बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण रास्ता अपनाने की अपील की.
पहले की घटनाओं से गहराया है संकट
ये घटना 13 मई को कांगपोकपी और नोनी जिलों में हुए दोहरे हमलों के बाद पैदा हुए भारी तनाव के बीच हुई है. उन हमलों में तीन चर्च नेताओं और एक नागा व्यक्ति सहित चार नागरिकों की मौत हो गई थी. उस घटना के बाद दोनों समुदायों के बीच बदले की भावना भड़क उठी थी, जिसके बाद दोनों पक्षों से 48 नागरिकों का अपहरण कर लिया गया था.
हालांकि कई बंधकों को बाद में रिहा कर दिया गया, लेकिन नागरिक समाज समूहों का दावा है कि 14 कुकी और 6 नागा लोग अब भी लापता हैं.
यह भी पढ़ें: मणिपुरः नगा-कूकी हिंसा में अब NIA की एंट्री, लापता नागरिकों के मामले की करेगी जांच
पुराने हिंसा मामले में 4 संदिग्ध गिरफ्तार
पुरानी हिंसा के सिलसिले में अधिकारियों ने चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने ये भी बताया कि नेशनल हाईवे-202 पर हुए एक और हमले में पश्चिम बंगाल के एक ट्रक ड्राइवर की मौत हो गई थी, उसे भी हथियारबंद कुकी उग्रवादियों ने अंजाम दिया था. क्षेत्र में जातीय तनाव दोबारा भड़कने की आशंकाओं के बीच सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर रख रही हैं.
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