प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (1 जून) को नई दिल्ली में म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के साथ अहम बैठक की. इस दौरान भारत ने सीमा पार सक्रिय भारतीय विद्रोही संगठनों का मुद्दा मजबूती से उठाया. जवाब में म्यांमार के राष्ट्रपति ने भरोसा दिलाया कि उनकी जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किसी भी गतिविधि के लिए नहीं होने दिया जाएगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत लगातार उत्तर-पूर्वी राज्यों की सुरक्षा और सीमा पार गतिविधियों को लेकर सतर्क बना हुआ है. दोनों देशों के बीच हुई यह बातचीत सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है.
दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर म्यांमार में भारत विरोधी समूहों की गतिविधियों का मुद्दा उठाया. उन्होंने बताया कि म्यांमार के राष्ट्रपति ने भारत की चिंताओं को गंभीरता से लेने की बात कही और भरोसा दिया कि ऐसे संगठनों के खिलाफ जरूरी कदम उठाए जाएंगे. मिस्री ने कहा कि म्यांमार ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी जमीन को भारत की सुरक्षा के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देगा और इस दिशा में कार्रवाई जारी रखेगा.
बैठक के दौरान म्यांमार के अंदरूनी हालात और वहां चल रहे संघर्षों पर भी चर्चा हुई. विदेश सचिव ने कहा कि म्यांमार में सेना और अलग-अलग जातीय हथियारबंद संगठनों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है. ऐसे में वहां की सरकार सभी पक्षों को एक मंच पर लाकर शांति प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने बताया कि म्यांमार प्रशासन एक ऐसी व्यवस्था बनाने पर काम कर रहा है, जिससे व्यापक राष्ट्रीय सहमति बन सके और देश में स्थिरता कायम हो.
भारत के लिए म्यांमार सिर्फ पड़ोसी देश नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से बेहद अहम साझेदार भी है. भारत और म्यांमार के बीच करीब 1643 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो उत्तर-पूर्वी राज्यों से जुड़ी हुई है. ऐसे में वहां की अस्थिरता का असर सीधे भारत की सुरक्षा और सीमावर्ती इलाकों पर पड़ सकता है. इसके अलावा म्यांमार भारत की ‘Act East Policy’ और दक्षिण-पूर्व एशिया से कनेक्टिविटी के लिए भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. इसलिए भारत लगातार चाहता है कि म्यांमार में शांति और स्थिरता बनी रहे.
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि म्यांमार में स्थिरता सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे ASEAN क्षेत्र के लिए जरूरी है. म्यांमार ASEAN का अहम सदस्य है और वहां के हालात का असर क्षेत्रीय एकजुटता पर भी पड़ता है. उन्होंने कहा कि भारत चाहता है कि म्यांमार में बातचीत और सहमति के जरिए समाधान निकले ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे. भारत का मानना है कि स्थिर और शांत म्यांमार न सिर्फ सुरक्षा बल्कि व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग के लिहाज से भी बेहद जरूरी है.
(इनपुट-एजेंसी के साथ)
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें India Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
गार्गी संतोष Zee Media के India.com में सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह हाइपरलोकल, नेशनल और वर्ल्ड न्यूज सेक्शन संभालती हैं. गार्गी को लाइफस्टाइल, स्पोर्ट्स और वायरल … और पढ़ें
Subscribe to Our Newsletter Today!
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.
© 1998-2026 INDIADOTCOM DIGITAL PRIVATE LIMITED, ALL RIGHTS RESERVED