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कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर चल रहा विवाद संसद तक पहुंच गया है. ये मामला जांच के दायरे में आने वाला है, क्योंकि शिक्षा संबंधी स्थायी समिति ने छात्रों की ओर से उठाई गई चिंताओं की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है. यह कदम कथित तकनीकी खामियों, मूल्यांकन में गलतियों और परिणाम सत्यापन प्रक्रिया के दौरान छात्रों द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों को लेकर बढ़ती शिकायतों के बीच आया है, जिससे सांसदों को प्रमुख शिक्षा अधिकारियों से जवाब मांगने के लिए प्रेरित किया गया है.
इस मामले में संसद के एजुकेशन कमेटी ने स्कूल शिक्षा विभाग के सेक्रेटरी संजय कुमार और CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह को बुलाया है. कमेटी उनसे यह जानना चाहती है कि OSM सिस्टम (ऑनलाइन मार्किंग सिस्टम) कैसे काम कर रहा है और इसे लेकर छात्रों को क्या-क्या परेशानियां आ रही हैं.
छात्र भी लेंगे भाग
इस बैठक की सबसे खास बात ये है कि खुद CBSE के छात्र भी इसमें शामिल होंगे. वे सीधे तौर पर सांसदों को बताएंगे कि कॉपी चेक होने और रिजल्ट आने के दौरान उन्हें क्या-क्या दिक्कतें झेलनी पड़ीं. पिछले कुछ हफ्तों से छात्र सोशल मीडिया पर जिस परेशानी का जिक्र कर रहे थे, उसकी असली सच्चाई अब सीधे कमेटी के सामने आएगी. इसके अलावा, कमेटी ने भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी सर्ट-इन (CERT-In) के बड़े अधिकारी को भी बुलाया है.
इससे साफ है कि नेता लोग इस पूरे मामले को सिर्फ एक तकनीकी गड़बड़ी नहीं मान रहे बल्कि इसके सुरक्षा पहलू की भी जांच करना चाहते हैं. दरअसल, लोगों ने शिकायत की थी कि इस ऑनलाइन सिस्टम में कमियां हैं और डेटा सुरक्षित नहीं है, इसीलिए अब साइबर एक्सपर्ट्स की मदद ली जा रही है ताकि पता चल सके कि डिजिटल सिस्टम कितना मजबूत और सुरक्षित है.
दिग्विजय सिंह करेंगे समिति की अध्यक्षता
कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली स्थायी समिति कक्षा 9 और 10 के लिए तीन-भाषा फार्मूले के बारे में चर्चा करने करेंगे. यह एक और मुद्दा है जिसने शिक्षा से जुड़े हितधारकों और राज्य सरकारों के बीच बहस को जन्म दिया है. इस बैठक में इस बात का आकलन किए जाने की उम्मीद है कि क्या प्रौद्योगिकी-आधारित मूल्यांकन प्रणालियों में परिवर्तन प्रभावी ढंग से किया गया है और क्या छात्रों के हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं. पैनल की चर्चाएं परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता में सुधार लाने के उद्देश्य से सिफारिशों का मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं, साथ ही स्कूली शिक्षा सुधारों से संबंधित व्यापक चिंताओं को भी संबोधित कर सकती हैं.
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