जिसे नहीं पकड़ पाए एक्सपर्ट, उसे 16 साल के लड़के ने ढूंढ निकाला! NEET-JEE पोर्टल की खोली पोल – India.Com

Who is Rylen Anil: इस 16 साल के लड़के ने ऐसा काम कर दिखाया है, जो बड़े-बड़े लोग भी नहीं कर सके. दरअसल, हम बात कर रहे हैं दुबई में रहने वाले राइलन अनिल (Rylan Anil) की. इस लड़के ने ऐसा काम कर दिखाया जिसने देश की प्रमुख परीक्षा एजेंसियों का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया. 12वी क्लास में पढ़ने वाले इस छात्र ने कुछ ही दिनों के अंदर NEET और JEE Advanced जैसे एग्जाम पोर्टल में सुरक्षा से जुड़ी खामियां पता लगा लीं और इन सभी खामियों को अधिकारियों के सामने रखा.

राइलन की ये उपलब्धि केवल तकनीकी कौशल का उदाहरण नहीं है, बल्कि ये भी दिखाती है कि युवा पीढ़ी डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में कितनी गंभीर भूमिका निभा सकती है. उनकी सूचना के बाद राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) और संबंधित संस्थानों ने तुरंत कार्रवाई की और कमजोरियों को दूर करने का काम शुरू किया.

राइलन ने बताया कि उनकी रुचि कंप्यूटर सिस्टम और तकनीक में काफी पहले से थी. आठवीं क्लास से ही वे अलग-अलग कंप्यूटर सिस्टम, लिनक्स प्लेटफॉर्म और साइबर सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों को समझने लगे थे. धीरे-धीरे उन्होंने बग बाउंटी प्रोग्राम, कैप्चर द फ्लैग (CTF) जैसे साइबर सुरक्षा आधारित प्लेटफॉर्म पर अभ्यास शुरू किया. यही अनुभव आगे चलकर उन्हें सुरक्षा खामियों को पहचानने और उनका विश्लेषण करने में मददगार साबित हुआ. उनका सपना भविष्य में साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट बनने का है.

राइलन ने बताया कि NEET पोर्टल में मौजूद खामी को समझने और उसकी पुष्टि करने में उन्हें लगभग तीन घंटे लगे. वहीं JEE Advanced से जुड़ी समस्या को पहचानने में तीन से चार घंटे का समय लगा. हालांकि, उनका मानना है कि ऐसा करने के लिए तकनीकी समझ और अनुभव की जरूरत होती है. उन्होंने संबंधित तकनीकी विवरण सार्वजनिक करने के बजाय पहले सरकारी एजेंसियों को जानकारी दी ताकि किसी भी तरह का दुरुपयोग न हो सके. साइबर सुरक्षा समुदाय में इसे जिम्मेदार प्रकटीकरण (Responsible Disclosure) कहा जाता है.
राइलन के अनुसार, NEET पोर्टल में खामी मिलने के बाद उन्होंने सबसे पहले संबंधित साइबर सुरक्षा एजेंसी को इसकी जानकारी भेजी. इसके कुछ समय बाद मामला चर्चा में आ गया. अगले ही दिन उन्हें NTA के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से संपर्क किया गया. उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने उनकी जानकारी को गंभीरता से लिया और उन्हें धन्यवाद भी दिया. इसके बाद संबंधित पोर्टल में आवश्यक सुधार किए गए. JEE Advanced मामले में भी सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई गई और कुछ ही घंटों में समस्या को ठीक कर दिया गया.

राइलन अकेले ऐसे छात्र नहीं हैं जो शिक्षा प्रणाली की डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं. देश में ऐसे कई युवा एथिकल हैकर्स सामने आए हैं, जिन्होंने विभिन्न शैक्षणिक पोर्टलों में सुरक्षा संबंधी कमजोरियों की तरफ ध्यान दिलाया है. राइलन का मानना है कि आज कई युवा तकनीकी एक्पसर्ट्स प्रेरित होकर सरकारी और सार्वजनिक डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा का परीक्षण कर रहे हैं. इससे भविष्य में साइबर हमलों और डेटा लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है. उनके अनुसार अगर खामियों को समय रहते पहचान लिया जाए तो लाखों छात्रों और उपयोगकर्ताओं का डेटा सुरक्षित रखा जा सकता है.
NEET को भविष्य में ऑनलाइन आयोजित किए जाने की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल के जवाब में राइलन ने कहा कि तकनीकी रूप से ऐसा करना संभव है, लेकिन इसके लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था जरूरी होगी. उन्होंने माना कि चाहे परीक्षा ऑनलाइन हो या ऑफलाइन, सबसे महत्वपूर्ण बात सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है. यदि उचित सुरक्षा उपाय अपनाए जाएं तो डिजिटल प्रणाली प्रभावी ढंग से काम कर सकती है.
सिस्टम की खामियों को उजागर करने वाले कई छात्रों को सोशल मीडिया पर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना भी करना पड़ा है. इस बारे में राइलन का कहना है कि शुरुआत में उन्हें भी डर लगा था कि लोग उनकी मंशा को गलत समझ सकते हैं. हालांकि, उनका मानना है कि सुरक्षा खामियों की ओर ध्यान दिलाना देश के हित में है. अगर कोई व्यक्ति जिम्मेदारी से समस्या की जानकारी देता है और उसे ठीक करवाने में मदद करता है, तो ये व्यवस्था को मजबूत बनाने का काम है, न कि उसे नुकसान पहुंचाने का.
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हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक… तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी … और पढ़ें
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