मणिपुर में जातीय तनाव और हिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार तड़के राज्य के कांगपोकपी (Kangpokpi) जिले में एक बड़ा संदिग्ध उग्रवादी हमला हुआ है। इस खौफनाक वारदात में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 7 घरों को आग के हवाले कर दिया गया। राज्य में कुकी जनजातियों के शीर्ष निकाय ‘कुकी इनपी मणिपुर’ (KIM) ने इस घटना की जानकारी दी है।
KIM की ओर से जारी एक प्रेस बयान के मुताबिक, शुक्रवार तड़के करीब 4 बजे भारी हथियारों से लैस उग्रवादियों ने लोइबोल खुल्लेन गांव पर हमला कर दिया। संगठन ने आरोप लगाया है कि इस वारदात को NSCN-IM और उसके प्रॉक्सी संगठन ZUF (K) के कैडरों ने अंजाम दिया है। संगठन के मुताबिक, इस हमले में तीन नागरिकों की जान चली गई, सात घर जलकर खाक हो गए और लोगों की संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है।
कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (KSO), साउथ वेस्ट सदर हिल्स की ओर से जारी एक अन्य बयान में मृतकों की उम्र और पहचान की पुष्टि की गई है। इस हमले में जान गंवाने वाले सभी लोग लोइबोल खुल्लेन गांव के ही निवासी थे, जिनकी पहचान इस प्रकार है:
गौरतलब है कि मणिपुर में पिछले तीन साल से अधिक समय से जातीय तनाव और हिंसा का माहौल है। इसी तनावपूर्ण पृष्ठभूमि के बीच यह ताजा हिंसक घटना घटी है। हालांकि, इस संदिग्ध उग्रवादी हमले को लेकर फिलहाल पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान या टिप्पणी सामने नहीं आई है।
मणिपुर में जारी संकट के बीच अब 6 नागा नागरिकों के अपहरण का मुद्दा गरमा गया है। इन बंधकों की सुरक्षित वापसी के लिए राज्य में लगातार विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं और सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है। ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन, मणिपुर (ANSAM) ने शुक्रवार को राज्य सरकार से मांग की है कि वह सभी छह नागा बंधकों को तुरंत रिहा कराए और उन्हें उनके परिवारों को सौंपे।
ANSAM के अध्यक्ष टी. एंग्टेशंग मारिंग ने बताया कि उनके संगठन ने बंधकों के समर्थन में एक ‘एकजुटता मार्च’ (Solidarity March) शुरू किया है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार को चेतावनी (अल्टीमेटम) दी है कि वे जल्द से जल्द इस मामले में ठोस कार्रवाई करें।
इससे पहले 28 मई को ‘ऑल मणिपुर नुपी मारुप’ नाम के संगठन ने बंधकों की रिहाई की मांग को लेकर इंफाल के इरावत भवन पर एक बड़ी विरोध रैली निकाली थी। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर अपहरण की घटनाओं को रोकने की अपील की। संगठन की सहायक सचिव निंगथौजम प्रमिला के मुताबिक, इस रैली का मुख्य मकसद आम लोगों की परेशानियों को सत्ता में बैठे नेताओं तक पहुंचाना था। संगठन ने मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को राज्य के मौजूदा संकट को लेकर एक ज्ञापन भी सौंपा है।
इस मामले को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज है। बुधवार को ही मणिपुर कांग्रेस के अध्यक्ष कीशम मेघचंद्र सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने मणिपुर के वर्तमान हालात और संकट को लेकर आयोग के समक्ष आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है।
जानकारी के मुताबिक, इन छह नागा नागरिकों का कथित तौर पर 13 मई को अपहरण किया गया था। इनकी सुरक्षित और तत्काल रिहाई के लिए सोमवार को ‘नागा पीपुल्स यूनियन’ ने भी इंफाल में एक विशाल रैली का आयोजन किया था और राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा था।
गौरतलब है कि इससे पहले 15 मई को एक सकारात्मक पहल देखने को मिली थी। तब कुकी और नागा, दोनों पक्षों ने 14-14 (कुल 28) बंधकों को रिहा किया था। यह रिहाई यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC), नागरिक समाज संगठनों (CSOs) और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से संभव हो पाई थी।
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