भारत सरकार ने देश के मार्केट को विदेशी निवेशकों के लिए ऑकर्षक बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है, जिससे रुपये में तेजी आने और डॉलर रिजर्व का फ्लो बढ़ने की उम्मीद है. यह स्टॉक मार्केट के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है. सरकार के इन फैसलों से माना जा रहा है कि विदेशी निवेश तेजी से बढ़ सकता है.
बॉन्ड मार्केट के लिए सबसे बड़ा फैसला
5 जून को सिर्फ रेपो रेट अनचेंज रखने का फैसला नहीं लिया गया है, बल्कि सरकार ने विदेशी निवेशकों के लिए एक अध्यादेश जारी किया है. विदेशी निवेशकों यानी FIIs को भारत की गवर्नमेंट सिक्योरिटीज यानी G-Sec में निवेश पर कैपिटल गेन टैक्स छूट दी है. यह अध्यादेश 5 जून को जारी किया गया, लेकिन 1 अप्रैल 2026 से ही प्रभावी माना जाएगा.
आसान शब्दों में कहें तो अगर कोई विदेशी निवेशक भारत के बॉन्ड मार्केट में निवेश करता है और फिर उस बॉन्ड को बेचता है तो उसे कोई लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स नहीं देना पड़ेगा. वह अपना पूरा मुनाफा ले जा सकता है. माना जा रहा है कि यह फैसला रुपये को सपोर्ट करेगा और विदेशी कैपिटल (FII/FPI) को आकर्षित करेगा. साथ ही भारतीय वित्तीय बाजारों में डॉलर का प्रवाह बढ़ा सकता है. इससे बॉन्ड मार्केट से लेकर शेयर बाजार तक में मजबूत आने की संभावना बन गई है.
RBI ने भी उठाए बड़े कदम
सबसे पहले आरबीआई ने रेपो रेट में बदलाव नहीं करके शेयर बाजार निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत दी है. खासकर बैंकिंग और फाइनेंस शेयरों को एक सपोर्ट मिला है. फैसले के बाद इन शेयरों में मजबूती भी देखने को मिली. इसके साथ ही विदेशी मुद्रा भंडार और डॉलर प्रवाह बढ़ाने के लिए भी कुछ फैसले लिए गए हैं.
शेयर बाजार के लिए क्या असर?
किन शेयरों को मिलेगा ज्यादा लाभ
सरकार और आरबीआई के इन फैसलों से कुछ सेक्टर को सबसे ज्यादा लाभ मिलता हुआ दिख रहा है. इसमें सरकारी बॉन्ड मार्केट सबसे पहले हैं. इसके बाद बैंकिंग शेयर, सरकारी बैंक के शेयर, एनबीएफसी कंपनियों के शेयर और कैपिटल मार्केट से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी की उम्मीद है.
(नोट- किसी भी शेयर या बॉन्ड मार्केट में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू