कॉकरोच जनता पार्टी को जंतर-मंतर पर एक दिन के विरोध प्रदर्शन से क्या हुआ हासिल – BBC

इमेज स्रोत, ANI
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के फ़ाउंडर अभिजीत दीपके के शनिवार (6 जून 2026) को दिल्ली पहुंचने के साथ ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर हज़ारों लोगों का प्रदर्शन देर शाम ख़त्म हो गया.
प्रदर्शन में शामिल लोग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे.
शनिवार की सुबह अभिजीत दीपके ने अमेरिका से दिल्ली आने के बाद एयरपोर्ट से उतरते ही कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए क्योंकि पेपर लीक होने की वजह से नीट की परीक्षा देने वाले कई स्टूडेंट्स ने आत्महत्या की है.
इससे पहले अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर बताया था कि कॉकरोच जनता पार्टी को दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की मंज़ूरी मिल गई है.
कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत एक ऑनलाइन व्यंग्यात्मक आंदोलन के तौर पर हुई थी.
ये 'ऑनलाइन मूवमेंट' भारत के चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की उस टिप्पणी के विरोध में हुआ था, जिसमें उन्होंने कुछ 'फ़ेक डिग्री वाले युवाओं' की तुलना कॉकरोच से की थी.
लगभग दो सप्ताह पहले ही शुरू हुए इस ऑनलाइन मूवमेंट को काफ़ी लोगों को समर्थन मिलता दिख रहा है. इंस्टाग्राम, एक्स और फेसबुक पर इसके फ़ॉलोअर्स की संख्या लाखों में पहुंच चुकी है.
इमेज स्रोत, ANI
शनिवार को अभिजीत दीपके के जंतर-मंतर पर पहुंचने से पहले ही लोगों का वहां जुटना शुरू हो गया था.
समाप्त
दिल्ली एयरपोर्ट से जंतर-मंतर तक पहुंचने के साथ ही लगभग दो से तीन हज़ार समर्थक वहां जमा हो गए.
अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर पर पहुंचकर कहा, "पिछले 5, 10 दिन से लोग मुझसे सवाल कर रहे थे कि सोशल मीडिया पर पेज चलाकर क्या होगा. उन लोगों को कैमरा घुमाकर ये दिखा दीजिए कि जंतर-मंतर पर कितने कॉकरोच घर से बाहर निकल कर आएं हैं."
उन्होंने दावा किया, "महज़ एक-दो दिन में हमारे साथ लाखों स्टूडेंट्स होंगे. ये कॉकरोच जनता पार्टी कोई प्लान की हुई पार्टी नहीं है. ये हर एक स्टूडेंट की आवाज़ है, जो सरकार से नाराज़ है."
उन्होंने कहा, "10-12 साल से इन लोगों ने हमें हिंदू- मुसलमान की राजनीति में फँसा कर रखा, इससे किसे फ़ायदा हुआ? क्या हिंदू-मुसलमान करने से देश में किसी को भी नौकरियां मिलीं?"
दीपके ने कहा, ''मेरी मां को बहुत डर था कि मुझे ये सरकार जेल में डाल देगी. इस देश में उस हर मां को ये डर होता है जब उनका बच्चा इस सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता है. कब तक हम इस सरकार से डर कर जिएंगे?''
समाप्त
इमेज स्रोत, ANI
कॉकरोच पार्टी के इस प्रदर्शन में पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी हिस्सा लेते दिखे.
इस प्रदर्शन को कवर कर रहे बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा ने बताया कि जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके के पहुंचने तक कई हज़ार लोग जमा हो चुके थे.
उन्होंने कहा कि युवाओं में नीट पेपर लीक को लेकर काफ़ी ग़ुस्सा दिखा और वो कॉकरोच जनता पार्टी की इस मांग का समर्थन करते दिखे कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.
यहां आ रहे कई युवक-युवतियां यह सवाल पर उठा रहे थे कि शिक्षा व्यवस्था तो ठीक करना दूर सरकार उन परीक्षाओं को ठीक से नहीं करा पा रही है जिन पर देश की लाखों का युवाओं का भविष्य टिका हुआ है.
दिलनवाज़ पाशा ने बताया वहां इस प्रदर्शन करने वाले हिंदूवादी संगठन के भी लोग जमा थे लेकिन उनकी संख्या ज़्यादा नहीं थी.
समाप्त
इमेज स्रोत, Getty Images
वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.
एपिसोड
समाप्त
विपक्षी राजनीतिक पार्टियों ने कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में खुलकर बोलना शुरू किया है.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने फ़ेसबुक पर बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के एक वीडियो को शेयर करते हुए लिखा,''गुरूरमंद हुक्मरानों तक पहुंचे ये आवाज़, अब नौजवानों ने भी कर दिया है इंक़लाब'
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एक बयान जारी कर कहा, ''नीट पेपर लीक ने लाखों युवाओं के सपनों को तोड़ दिया है. ये सभी पीड़ित युवक-युवतियां अब 'कॉकरोच' बनकर अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं. सरकार को उनकी बात सुननी ही पड़ेगी. इन 'कॉकरोचों' को कम मत आंकिए. जंतर-मंतर के आंदोलन ने सरकार को यही चेतावनी दी है."
शिवसेना नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा है कि कॉकरोच जनता पार्टी को प्रदर्शन की इजाज़त देकर दिल्ली पुलिस ने ठीक काम किया है.
प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "शायद पहली बार दिल्ली पुलिस ने सही काम किया है, सीजेपी को प्रदर्शन की इजाज़त देकर."
राजनीतिक कार्यकर्ता और विश्लेषक योगेंद्र यादव ने एक्स पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं के समर्थन में विनोद कुमार शुक्ल की एक कविता पढ़ी.
समाप्त
इमेज स्रोत, ANI
कॉकरोच जनता पार्टी के इस प्रदर्शन की सोशल मीडिया पर काफ़ी चर्चा रही.
लोग इस प्रदर्शन से निकले संदेश का विश्लेषण कर रहे हैं. वो ये सवाल भी पूछ रहे हैं कि आमतौर पर इस तरह के प्रदर्शन को लेकर सख़्त दिखने वाली मोदी सरकार ने इसकी इजाज़त इतनी आसानी से कैसे दे दी.
इसके साथ ही प्रदर्शन के असर और इसके 'ऑनलाइन मूवमेंट' के भविष्य पर भी चर्चा हो रही है.
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक स्मिता गुप्ता ने इस बारे में बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बात करते हुए कहा, ''सरकार बांग्लादेश और नेपाल में ज़ेन जी के आंदोलन देख चुकी है. चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत के कॉकरोच वाले बयान और उसके बाद उस पर हुई तीखी प्रतिक्रिया के बाद सरकार को ये आंदोलन याद आ गए और उसने उसे थोड़ा स्पेस देने का मन बना लिया.''
''उसका एक मक़सद ये भी था कि इसके ज़रिये इसकी वॉटर टेस्टिंग भी हो जाएगी कि आख़िर इसमें कितना दम है. इसलिए दिल्ली पुलिस ने आसानी से प्रदर्शन की इजाज़त दे दी.''
उन्होंने कहा, ''पेपर लीक का मुद्दा हर परिवार को छूने वाला मुद्दा है. इसलिए लोगों में ग़ुस्सा भी है. सरकार इस ग़ुस्से को शांत होने देना चाहती थी.''
''इससे पहले नॉर्वे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक युवा पत्रकार से सवाल पूछे जाने का मामला काफ़ी गर्माया था. इसलिए भी वो बैकफ़ुट पर थी.''
स्मिता गुप्ता ने कहा, ''जब चुनाव होते हैं तो बेरोज़गारी का सबसे बड़ा मुद्दा बताया जाता है. लेकिन यहां तो युवा देख रहे हैं कि रोज़गार मिलना तो दूर उनका परीक्षा में बैठना भी मुश्किल हो गया है. युवाओं में बेचैनी है. भविष्य अंधकार में है.''
आख़िर इस तरह के ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म से शुरू करके प्रदर्शन का भविष्य क्या है? क्या ये भविष्य में कोई राजनीतिक ताक़त बन पाएगा?
स्मिता गुप्ता ने कहा, ''कुछ साल पहले कन्हैया कुमार के नेतृत्व में जेएनयू में चला आंदोलन लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे बड़े मुद्दों को लेकर था लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन ऐसे मुद्दे को लेकर है जिसका देश के हर घर से वास्ता है. वो है ख़राब शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा. इसलिए इसे समर्थन मिल रहा है.''
उन्होंने कहा, ''ये प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब मोदी सरकार का हनीमून पीरियड ख़त्म हो रहा है. दुनिया भर में चल रहे युद्ध से भारत में ख़राब आर्थिक हालात से लोग तंग हो रहे हैं. हेल्थ जैसी कल्याणकारी योजनाओं पर ख़र्च कम हो रहा है. इस असंतोष की वजह से ऐसे प्रदर्शनों की प्रासंगिकता बनी रहेगी.''
समाप्त
इमेज स्रोत, ANI
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक शरद गुप्ता इस प्रदर्शन को व्यवस्था के प्रति लोगों के आक्रोश और असंतोष के प्रतीक के तौर पर देखते हैं.
वो कहते हैं, ''अगर लोगों में असंतोष न होता तो वो चिलचिलाती गर्मी में जमा होकर शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा नहीं मांगते. ये सबकुछ उस दौर की याद दिला रहा था जब 'निर्भया' मामले में दिल्ली में लोग भारी ठंड में भी वॉटर कैनन की परवाह न करते हुए इंसाफ़ मांगने सड़कों पर उतर आए थे.''
उन्होंने कहा, ''ये सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन दिख रहा है लेकिन ये उस व्यवस्था का विरोध है जो किसी को ज़िम्मेदारी नहीं लेने देती. सत्ता पक्ष की ओर से ये कहा जाता है कि ये वो सरकार नहीं है जिसमें मंत्रियों के इस्तीफ़े होते हैं.''
सरकार की ओर इस प्रदर्शन को आसानी से इजाज़त देने के सवाल पर शरद गुप्ता ने कहा, ''जयप्रकाश आंदोलन, वीपी सिंह के आंदोलन से लेकर अन्ना आंदोलन तक, जब भी सरकार ने ऐसे आंदोलनों को दबाने की कोशश की ये और भड़के हैं. इसलिए सरकार ने प्रदर्शन की इजाज़त देकर इसकी हवा निकालने की रणनीति अपनाई.''
क्या कॉकरोच जनता पार्टी जैसे संगठन का कोई राजनीतिक भविष्य है. क्या ये कोई बड़ी राजनीतिक ताक़त बन पाएंगे.
शरद गुप्ता ने कहा, '' कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े लोग राजनीतिक तौर पर बिल्कुल अनुभवहीन हैं. इनके तीन प्रवक्ता पत्रकार रहे हैं. भविष्य में ये कोई राजनीतिक दल बन जाए तो अच्छी बात होगी. हो सकता है कि ये आम आदमी पार्टी की तरह ही कोई पार्टी बनकर सामने आए. लेकिन फ़िलहाल मुझे उनके राजनीतिक भविष्य की कोई ठोस तस्वीर नहीं दिखती.''
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
समाप्त
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
© 2026 BBC. बाहरी साइटों की सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है. बाहरी साइटों का लिंक देने की हमारी नीति के बारे में पढ़ें.

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News