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उत्तराखंड के प्रसिद्ध ट्रैकिंग स्थल दयारा बुग्याल क्षेत्र में 29 तारीख की रात बेस कैंप गोई से लापता हुई नैनीताल जिले के रामनगर की रहने वाली बबीता पांडे का अब तक कोई पता नहीं चल सका है. कई दिनों से लगातार चलाए जा रहे खोज एवं बचाव अभियान के बावजूद राहत टीमों को महिला के संबंध में कोई महत्वपूर्ण सुराग नहीं मिला है.
अलग-अलग रास्तों पर निकली 3 टीमें
अब आज 9 जून 2026 को पुलिस, NDRF, SDRF, ITBP, वन विभाग, नेहरु पर्वतारोहण संस्थान, आपदा प्रबन्ध की क्यूआरटी, स्वान दल, एसओजी, स्थानीय लोग एवं गाइड की 3 टीमों का गठन किया गया है. इनमें कुल 120 से अधिक सदस्य शामिल हैं. ये टीमें तीन अलग-अलग रास्तों से सर्च ऑपरेशन के लिए निकल चुकी हैं.
साथ ही 3 ड्रोन टीम को भी सर्चिंग में लगाया गया है. जिनके द्वारा विभिन्न क्षेत्र व अलग-अलग दिशाओं में ट्रेक मार्गों, जंगलों, खाइयों, गदेरों, झाड़ियों तथा अन्य संभावित स्थानों पर सघन कॉम्बिंग व तलाशी अभियान चलाया जा सके.
जंगल से आई दो भालुओं की आवाज
प्रशासन द्वारा रविवार को हेलीकॉप्टर की मदद से भी हवाई खोज अभियान संचालित किया गया था ताकि दयारा बुग्याल और आसपास के दुर्गम इलाकों में किसी भी संभावित संकेत को तलाशा जा सके, लेकिन कुछ भी हाथ नहीं लगा.
इस बीच स्थानीय ग्रामीणों के बीच एक और संभावना को लेकर चर्चा हो रही है. कुछ ग्रामीणों का कहना है कि हाल के दिनों में दयारा बुग्याल से सटे जंगलों में दो भालुओं के आपसी संघर्ष जैसी तेज आवाजें सुनाई दी थीं. साथ ही कुछ जगहों पर खून जैसे निशान दिखाई देने की भी बात कही जा रही है. हालांकि इन दावों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और स्थानीय लोग भी इसे बबीता पांडे के लापता होने की घटना से सीधे तौर पर जोड़ने से बच रहे हैं.
आखिर बबीता पांडे के साथ क्या हुआ?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बबीता पांडे के साथ क्या हुआ? क्या यह महज ट्रैकिंग के दौरान हुआ कोई हादसा है, क्या वह रास्ता भटककर किसी दूसरे मार्ग पर चली गईं, या फिर इस घटना के पीछे कोई और कारण है जो अभी सामने नहीं आया है. इन सभी सवालों के जवाब फिलहाल पहाड़ों की खामोशी में छिपे हैं और पूरा उत्तरकाशी उनके बारे में किसी ठोस जानकारी का इंतजार कर रहा है.
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