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स्क्रैप मेटल की तलाश में एक बंद पड़े भवन में घुसा शख्स शायद ही सोच सकता था कि अगले कुछ सेकंड उसकी पूरी जिंदगी बदल देंगे. एक स्विचबोर्ड को छूते ही उसके शरीर में 11 हजार वोल्ट का करंट दौड़ गया. धमाका इतना जबरदस्त था कि वह कई फीट दूर जा गिरा.
डॉक्टरों ने उसे 14 मिनट तक क्लिनिकली डेड घोषित किया, 29 दिन तक वह कोमा में रहा और उसके शरीर का आधा हिस्सा बुरी तरह झुलस गया. लेकिन हैरानी की बात यह है कि वह मौत को मात देकर वापस लौट आया.
द मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन के मिडिल्सब्रा में रहने वाले डैरेन हैरिस के साथ यह दर्दनाक हादसा साल 2020 में हुआ था. उस समय उनकी उम्र 33 साल थी. डैरेन एक पुराने और खाली पड़े भवन में स्क्रैप मेटल तलाशने गए थे. उन्हें लगा कि इमारत को तोड़े जाने से पहले बिजली का कनेक्शन काट दिया गया होगा. लेकिन ऐसा नहीं था.
स्वीच टच करते सब कुछ बदल गया
डैरेन ने जैसे ही अपना हाथ एक स्विचबोर्ड पर रखा, उनके शरीर में 11,000 वोल्ट का करंट दौड़ गया. बताया जाता है कि यह सिस्टम करीब 980 घरों और 78 फैक्ट्री यूनिट्स को बिजली सप्लाई कर रहा था.
करंट का असर इतना भयानक था कि उनके दोनों हाथों की त्वचा और मांस जलकर हड्डियों तक पहुंच गई. धमाके की ताकत से वह दूर जा गिरे, लेकिन किसी तरह खुद को संभालते हुए इमारत से बाहर निकलने में सफल रहे.
29 दिन कोमा में रहे, 14 मिनट तक मृत घोषित
हादसे के बाद डैरेन को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत बेहद गंभीर थी. डॉक्टरों के मुताबिक वह दो बार मौत के करीब पहुंचे और एक बार तो 14 मिनट तक क्लिनिकली डेड रहे.
डैरेन बताते हैं कि मैं 29 दिन तक कोमा में था. मुझे तीन बार सेप्सिस हुआ, पूरे शरीर में किडनी फेलियर जैसी स्थिति बन गई. मैं दो बार मरा और 14 मिनट तक क्लिनिकली डेड था.
आईने में खुद को देखकर टूट गए
करीब एक महीने बाद जब डैरेन को होश आया तो उन्हें लगा कि शायद उनकी मौत हो चुकी है. अस्पताल में जब उन्होंने पहली बार खुद को आईने में देखा तो वह बुरी तरह टूट गए.
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उन्होंने कहा कि जब मैं जागा तो सब कुछ बहुत अजीब था. मैं दुखी था, गुस्से में था और सदमे में भी था. जब मैंने आईने में खुद को देखा तो मुझे समझ आया कि मेरे साथ क्या हुआ है.
33 सर्जरी, कान और नाक का हिस्सा खो दिया
डैरेन के शरीर को बचाने के लिए डॉक्टरों को कई जटिल ऑपरेशन करने पड़े. उनके पैरों की त्वचा लेकर चेहरे, पेट और हाथों को दोबारा बनाया गया. अब तक उनकी 33 से ज्यादा सर्जरी हो चुकी हैं. हादसे में उन्होंने अपने दोनों कान खो दिए और नाक का भी एक हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया.
शारीरिक नहीं, मानसिक दर्द भी झेला
डैरेन का कहना है कि इस हादसे ने सिर्फ उनके शरीर को नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी गहरा नुकसान पहुंचाया. उन्होंने बताया कि मैं कई सालों तक PTSD यानी पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर से जूझता रहा. कई बार जिंदगी से हार मानने जैसा महसूस हुआ. मैं अवसाद में गया, आत्महत्या तक की कोशिश की. लेकिन हर बार खुद को संभालकर वापस खड़ा हुआ.
अब चेहरे की सर्जरी का इंतजार
डैरेन अब चेहरे की रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी करवाना चाहते हैं. उनका मानना है कि इससे उनका आत्मविश्वास लौटेगा और वह सामान्य जीवन के और करीब पहुंच सकेंगे. इसके लिए उन्होंने फंड जुटाने का अभियान भी शुरू किया है. अब तक करीब 15 हजार पाउंड जुटाए जा चुके हैं, जबकि लक्ष्य 1 लाख पाउंड का है.
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इतने दर्द और संघर्ष के बावजूद डैरेन हार मानने को तैयार नहीं हैं. उनका कहना है कि वह अपनी कहानी के जरिए उन लोगों को हिम्मत देना चाहते हैं जो किसी संकट या मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. डैरेन कहते हैं कि मैं अपने सबसे बड़े दुश्मन के लिए भी ऐसी जिंदगी नहीं चाहूंगा. अगर मेरी कहानी किसी एक व्यक्ति को भी हिम्मत दे सके, तो मुझे लगेगा कि मेरी दूसरी जिंदगी का मकसद पूरा हो गया.
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