पाकिस्तानी ने अफगानिस्तान पर हमला किया है. अफ़गानिस्तान के कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में पाकिस्तानी सेना के हवाई हमलों में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 11 बच्चे, एक महिला और एक बुज़ुर्ग व्यक्ति शामिल थे. अफ़गान तालिबान प्रशासन ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इन्हें “मानवीय अपराध” और अफ़गानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन बताया.पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच कई महीनों से जानलेवा लड़ाई चल रही है, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए हैं. यह लड़ाई फरवरी के आखिर में तब शुरू हुई जब अफ़ग़ानिस्तान ने पाकिस्तान के हवाई हमलों के जवाब में पाकिस्तान पर सीमा-पार हमला किया. पाकिस्तान का आरोप है कि अफ़ग़ानिस्तान उन उग्रवादियों को पनाह देता है जो पाकिस्तान के अंदर जानलेवा हमले करते हैं, खासकर पाकिस्तानी तालिबान, जिसे ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ या TTP के नाम से जाना जाता है. यह गुट अफ़ग़ान तालिबान से अलग है, लेकिन उसका सहयोगी है. अफ़ग़ान तालिबान ने 2021 में अमेरिकी नेतृत्व वाली सेनाओं की अफरातफरी भरी वापसी के बीच सत्ता पर कब्ज़ा करने के बाद से अफ़ग़ानिस्तान पर शासन किया है. काबुल इस आरोप से इनकार करता है.
reuters.com के मुताबिक पाकिस्तान की सेना की तरफ से अफगानिस्तान के तीन प्रांतों में हवाई किए गए उस संघर्ष का नया दौर है जिसमें इस साल सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं. इन हमलों में अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया गया और कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में आम नागरिकों के घरों पर बम गिराए गए.
पाकिस्तानी सेना या सरकार की ओर से तुरंत कोई बयान नहीं आया, लेकिन सुरक्षा अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि इस्लामाबाद ने उन जगहों पर हवाई हमले किए हैं जिन्हें वे “पाकिस्तानी उग्रवादियों के ठिकाने और दूसरी सुविधाएं” बताते हैं, जिनका इस्तेमाल वे पाकिस्तान के खिलाफ करते हैं.
पाकिस्तान ने काबुल पर उग्रवादियों को पनाह देने का आरोप लगाया है, जिनके बारे में उसका कहना है कि वे पाकिस्तान में हमलों की साजिश रचते हैं. तालिबान ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि पाकिस्तान में चरमपंथ एक अंदरूनी समस्या है. हिंसा के फिर से शुरू होने से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लड़ाई में लंबे समय से चली आ रही शांति के भंग होने का खतरा पैदा हो गया है. ये दोनों देश कभी सहयोगी थे लेकिन अब दुश्मन बन गए हैं और फरवरी में इनके बीच कई सालों की सबसे भीषण लड़ाई हुई थी.
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फ़रहा फ़ातिमा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस से ग्रेजुएशन के बाद पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2015 में LIVE India में इंटर्नशिप से की. प्रारंभिक दौर में ही उन्होंने जामिया की जमीन पर अवैध कब्जे की बड़ी खबर ब्रेक की. पहली नौकरी लाइव हिन्दुस्तान में मिली, जहां एंटरटेनमेंट के साथ रिपोर्टिंग भी की. … और पढ़े
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