PM मोदी की फ्रांस यात्रा से खुलेंगे न्यूक्लियर एनर्जी के नए दरवाजे! भारत-फ्रांस साझेदारी को मिलेगी ऐतिहासिक र – India.Com

India-France Nuclear Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी फ्रांस यात्रा कई महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों के कारण चर्चा में है. माना जा रहा है कि ये दौरा भारत और फ्रांस के बीच रक्षा, परमाणु ऊर्जा, तकनीक, स्टार्टअप और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है. खास बात ये है कि हाल ही में भारत में पारित नए परमाणु ऊर्जा कानून के बाद दोनों देशों के बीच नागरिक परमाणु क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं.

भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वच्छ और टिकाऊ स्रोतों पर जोर दे रहा है. इसी दिशा में सरकार ने परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को आने वाले सालों में कई गुना बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है. वर्तमान में भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता सीमित है, लेकिन 2047 तक इसे बड़े स्तर पर विस्तार देने की योजना बनाई गई है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि फ्रांस जैसी तकनीकी रूप से उन्नत परमाणु शक्ति के साथ सहयोग इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है.

हाल में लागू हुए SHANTI (Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India) Act ने प्राइवेट सेक्टर के लिए भी नए अवसर पैदा किए हैं. इस कानून के बाद विदेशी और भारतीय निजी कंपनियों के बीच साझेदारी का दायरा बढ़ सकता है. फ्रांस की प्रमुख ऊर्जा कंपनी EDF भारतीय उद्योग समूहों के साथ संभावित परियोजनाओं पर चर्चा कर रही है। इससे छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) और एडवांस्ड मॉड्यूलर रिएक्टर (AMR) जैसी आधुनिक तकनीकों को भारत में बढ़ावा मिल सकता है.

मोदी की फ्रांस यात्रा केवल ऊर्जा सहयोग तक सीमित नहीं रहेगी. रक्षा क्षेत्र भी दोनों देशों के एजेंडे में प्रमुख स्थान रखता है. भारत के बहु-भूमिका लड़ाकू विमान कार्यक्रम (MRFA) को लेकर भी चर्चाएं आगे बढ़ सकती हैं. इस परियोजना के तहत बड़ी संख्या में अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों का निर्माण भारत में करने की योजना है. इससे ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी मजबूती मिलेगी और देश की रक्षा उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी.
फ्रांस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच कई द्विपक्षीय बैठकों का आयोजन होगा. दोनों नेता नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रक्षा सहयोग और वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करेंगे/ इसके अलावा ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम की मदद से भारतीय स्टार्टअप और तकनीकी संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी क्षमताएं प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा.

प्रधानमंत्री इस दौरे के दौरान जी-7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्रों में भी भाग लेंगे. यहां भारत वैश्विक दक्षिण यानी विकासशील देशों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की कोशिश करेगा. ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक आर्थिक संतुलन जैसे विषयों पर भारत का दृष्टिकोण अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखा जाएगा.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करती है. रक्षा, ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में संभावित समझौते आने वाले वर्षों में भारत की रणनीतिक और आर्थिक शक्ति को नई दिशा दे सकते हैं. कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी का फ्रांस दौरा भारत-फ्रांस संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत साबित हो सकता है, जिसका असर ऊर्जा सुरक्षा से लेकर रक्षा उत्पादन और तकनीकी नवाचार तक कई क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है.
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हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक… तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी … और पढ़ें
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