Climate Change Warning: कल्पना कीजिए कि दुनिया के कई बड़े तटीय शहर, जहां आज करोड़ों लोग रहते हैं, आने वाले समय में समुद्र के बढ़ते पानी के कारण पूरी तरह बदल जाएं. कुछ ऐसी ही चेतावनी वैज्ञानिकों की तरफ से आई है. स्पेस डेली में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, नई रिसर्च ने दुनिया के सामने एक गंभीर चेतावनी रख दी है. इसके के अनुसार, पश्चिम अंटार्कटिक आइस शीट बहुत कम अतिरिक्त समुद्री गर्मी के कारण भी ऐसे बिंदु पर पहुंच सकती है, जहां उसका पिघलना रुकना लगभग असंभव हो जाएगा. यदि ऐसा हुआ तो आने वाली सदियों में वैश्विक समुद्र स्तर करीब 4 मीटर तक बढ़ सकता है.
इस संबंध में शोधकर्ताओं का कहना है कि एक बार यह प्रक्रिया शुरू हो गई तो बाद में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में भारी कमी लाने पर भी इसे रोकना मुश्किल होगा. हालांकि यह निष्कर्ष एक मॉडलिंग अध्ययन पर आधारित है और वैज्ञानिक समुदाय में इस पर अभी और चर्चा जारी है. फिर भी इसे जलवायु परिवर्तन से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण चेतावनी माना जा रहा है.
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पश्चिम अंटार्कटिक आइस शीट का बड़ा हिस्सा समुद्र तल से नीचे स्थित चट्टानों पर टिका हुआ है. इसकी बाहरी बर्फीली परतें, जिन्हें आइस शेल्फ कहा जाता है, ग्लेशियरों को समुद्र की ओर तेजी से बढ़ने से रोकती हैं. लेकिन समुद्र के भीतर गर्म पानी इन आइस शेल्फ को नीचे से पिघला रहा है. इससे ग्लेशियरों का संतुलन बिगड़ रहा है और उनका आधार पीछे हट रहा है. वैज्ञानिक इसे ‘मरीन आइस शीट इंस्टेबिलिटी’ कहते हैं. शोध के अनुसार, यदि समुद्र का तापमान मौजूदा स्तर से केवल 0 से 0.25 डिग्री सेल्सियस और बढ़ता है, तो बर्फ का पीछे हटना अपने आप जारी रह सकता है. इसका मतलब यह है कि भविष्य में तापमान स्थिर होने पर भी बर्फ के पिघलने की प्रक्रिया चलती रह सकती है. इसस तटीय शहरों के लिए खतरे की घंटी के तौर पर देखा जा रहा है.
वैज्ञानिकों का ध्यान खास तौर पर अमुंडसेन सागर क्षेत्र पर है, जहां थ्वाइट्स और पाइन आइलैंड जैसे विशाल ग्लेशियर पहले से तेजी से बदल रहे हैं. आने वाले वर्षों में समुद्र की गहराई में तापमान कितना बढ़ता है और इन ग्लेशियरों की स्थिति कैसी रहती है, यह बेहद महत्वपूर्ण होगा. विशेषज्ञों का कहना है कि बर्फ की इतनी बड़ी चादर बनने में हजारों साल लगते हैं, लेकिन उसका अस्थिर होना कुछ दशकों में शुरू हो सकता है. समुद्र स्तर में 4 मीटर की वृद्धि तुरंत नहीं होगी, बल्कि सदियों में धीरे-धीरे दिखाई देगी. फिर भी इसका असर दुनिया के करोड़ों लोगों, तटीय शहरों और भविष्य की पीढ़ियों पर पड़ेगा. यही कारण है कि वैज्ञानिक इस अध्ययन को जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में एक गंभीर चेतावनी के रूप में देख रहे हैं.
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नंदन सिंह ने पत्रकारिता में करियर की शुरुआत साल 2015 में ईनाडु डिजिटल यानी ईटीवी (हैदराबाद) से की. यहां इन्होंने बतौर कॉपी राइटर करीब 10 महीनों तक काम किया. सीखने … और पढ़ें
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