प्रयागराज। चुनावी साल में छात्रों का विश्वास हासिल करने में जुटे उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने नकलचियों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई कर परीक्षा की शुचिता प्रभावित करने वाले हौसले पस्त कर दिए हैं। आयोग ने तीन से 17 जून के बीच केवल 15 दिनों में 14 अभ्यर्थियों पर एफआईआर कराकर साफ संदेश दिया है कि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। तीन जून को प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) भर्ती परीक्षा के दौरान 11 अभ्यर्थियों के खिलाफ बीएनएस और उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2024 के तहत विभिन्न जिलों में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। रायबरेली में राम मनोहर प्रजापति, बरेली में प्रमोद यादव, चित्रकूट में विवेक कुमार व दिलीप कुमार, जौनपुर में रावेन्द्र प्रसाद, मिर्जापुर में संदीप कुमार, लखनऊ में राम मनुज, रंग बहादुर यादव और अमरजीत सिंह जबकि हाथरस में विशाल के खिलाफ एफआईआर कराई गई।वहीं
चार जून को टीजीटी की लिखित परीक्षा के दूसरे दिन रायबरेली में मईया राम पटेल और वाराणसी में अमन कुमार पर मुकदमा कराया गया। वहीं 17 जून को प्रवक्ता भर्ती के साक्षात्कार में फर्जी तरीके से शामिल होने की कोशिश कर रही एक अभ्यर्थी वीनस श्रीवास्तव के खिलाफ कर्नलगंज थाने में मुकदमा कराया गया है। इससे पहले टीईटी आवेदन के समय फर्जी वेबसाइट बनाने वालों के खिलाफ भी एफआईआर कराई गई थी।
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