मानसून सत्र से पहले NDA अपने मिशन 360 में जुटा हुआ है. जहां एक ओर टीएमसी और शिवसेना उद्धव गुट में टूट हो चुकी है तो वहीं डीएमके जैसे दलों के साथ सरकार की बातचीत जारी है. उसके बाद भी अभी मिशन 360 पूरा होने में एक दर्जन सीटों की कमी दिख रही है. अब NDA ने नॉर्थ ईस्ट से अपना नया राजनीतिक ऑपरेशन शुरू कर दिया है. एक-एक सांसद जोड़ने की रणनीति के तहत NDA का कुनबा बढ़ रहा है, मिज़ोरम की सत्तारूढ़ पार्टी ZPM भी NDA के कुनबे में जुड़ने को तैयार है.
पूर्वोत्तर की 25 लोकसभा सीटों पर NDA पहले ही 16 सीटें जीत चुका है. लेकिन अब उसकी नजर उन दलों पर भी है जो गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं. मिजोरम की सत्तारूढ़ पार्टी ZPM इसका ताजा उदाहरण है. हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने गए पार्टी सांसद लालतलुआंगकिमा ने संसद में एनडीए सरकार को मुद्दा आधारित समर्थन देने की बात कही है. लोकसभा में भी पार्टी का एक सांसद है. यानी बिना एनडीए में औपचारिक रूप से शामिल हुए भी सरकार को दोनों सदनों में अतिरिक्त समर्थन मिलने लगा है. वहीं महाराष्ट्र में भी एनसीपी के साथ चर्चा की बात आ रही है.
नॉर्थ ईस्ट का गणित
कुल लोकसभा सीटें – 25
NDA – 16
विपक्ष/अन्य – 9
भाजपा – 13
AGP – 1
UPPL – 1
SKM – 1
कांग्रेस – 7
VPP – 1
ZPM – 1
दरअसल बीजेपी की रणनीति सिर्फ चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है. संसद के भीतर संख्या बढ़ाने के लिए कई मॉडल पर एक साथ काम किया जा रहा है. कहीं विपक्षी सांसद सीधे NDA में शामिल हो रहे हैं. कहीं विपक्षी राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे हो रहे हैं. कहीं विपक्षी सांसद NDA की सहयोगी पार्टियों में शामिल हो रहे हैं. कहीं छोटे दलों के जरिए नए राजनीतिक समीकरण बनाए जा रहे हैं और कहीं अलग गुटों को मान्यता दिलाकर संख्या बढ़ाई जा रही है.
इस रणनीति का असर सिर्फ विपक्ष पर नहीं बल्कि एनडीए के भीतर भी दिखाई दे रहा है. पिछले लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी के 240 सांसद थे. एनडीए में 16 सांसदों के साथ टीडीपी दूसरे नंबर पर और 12 सांसदों के साथ जेडीयू तीसरे नंबर पर थी. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है.
तृणमूल कांग्रेस से टूटकर आए 20 सांसदों के एक नए समूह के एनडीए के करीब आने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया अचानक गठबंधन की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई. इसके बाद चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी तीसरे स्थान पर खिसक गई.
उधर उद्धव ठाकरे की शिवसेना के 6 सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए. इससे शिंदे गुट के सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो गई और उसने जेडीयू को पीछे छोड़ दिया. कभी एनडीए की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी रही जेडीयू अब पांचवें स्थान पर पहुंच गई है.
NDA का बदलता संख्या का समीकरण
पहले
अब
सरकार के बड़े मंत्री कई क्षेत्रीय दलों के साथ संपर्क में है और प्रयास यही है मानसून सत्र से पहले मिशन 360 को पूरा कर लिया जाए. इस बार सरकार की पूरी कोशिश है कि मानसून सत्र में डेलिमिटेशन और महिला आरक्षण बिल को पास करवा लिया जाए.
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मीडिया में करियर की शुरुआत CNFC मीडिया के साथ की. उसके बाद साढ़े तीन वर्ष ANI और उसके बाद तकरीबन 8 वर्ष न्यूज 18 नेटवर्क के साथ काम किया. और अब एबीपी न्यूज ज्वाइन किया है. मीडिया में तकरीबन 13 वर्ष का अनुभव है जिसमें राजनीतिक खबरों खासकर बीजेपी से संबंधित खबरों को कवर करता रहा हूं.
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