मुख्य बातें
गोल्ड रिफाइनिंग और आभूषण बनाने वाली कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही खबर आई कि गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) भी इसकी जांच शुरू करने जा रहा है। इसके बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर गुरुवार को 5 प्रतिशत के लोअर सर्किट पर पहुंच गए। दोपहर करीब पौने तीन बजे स्टॉक 97.02 रुपये पर लॉक था, जो करीब 4.99 प्रतिशत की गिरावट दर्शा रहा था।
यह पूरा मामला तब और गहरा गया जब प्रवर्तन निदेशालय ने एक दिन पहले ही राजेश एक्सपोर्ट्स और उससे जुड़े लोगों के नौ ठिकानों पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत की गई तलाशी और जब्ती के नतीजे जारी किए।
ईडी के मुताबिक, जांच में कई गड़बड़ियों के संकेत मिले हैं, जिनमें संदिग्ध शेयर भाव में हेराफेरी, विदेशी लेन-देन के गायब दस्तावेज और सैलरी को लेकर असामान्य बर्ताव शामिल हैं।
ईटी के मुताबिक ईडी ने बताया कि कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी को साल 2020 से कोई सैलरी नहीं दिया गया था, जबकि मैनेजिंग डायरेक्टर करीब 17,000 रुपये प्रति माह वेतन ले रहे थे, जबकि कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू करीब 7.7 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया था।
नियामकीय जांच तेज होने के बीच द इकोनॉमिक टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से खबर दी कि कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने कंपनी की SFIO जांच के आदेश दे दिए हैं। खबर के अनुसार, यह जांच सेबी द्वारा चिन्हित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की गहराई से पड़ताल करेगी।
एसएफआईओ जटिल कॉरपोरेट धोखाधड़ी के मामलों की जांच करने वाली संस्था है और इसे कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 212 के तहत रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज की रिपोर्ट या सार्वजनिक हित में जांच का निर्देश दिया जा सकता है।
ईडी और एसएफआईओ की कार्रवाई से पहले बाजार नियामक सेबी ने 3 जून को एक अंतरिम आदेश जारी कर बड़ा खुलासा किया था। सेबी ने आरोप लगाया कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने पांच साल की अवधि में अपने कंसोलिडेटेड रेवेन्यू को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया।
नियामक के अनुसार, कंपनी ने विदेशी सब्सिडियरी, खासकर स्विट्जरलैंड की वालकैम्बी एसए को भारी रेवेन्यू दिखाया, जबकि उसी सब्सिडियरी के ऑडिटेड स्टैंडअलोन वित्तीय ब्योरे में आंकड़े काफी कम थे।
इसी आदेश के बाद सेबी ने आगे की कार्यवाही लंबित रहने तक कंपनी के प्रमोटर को शेयर खरीदने, बेचने या किसी तरह का लेन-देन करने से रोक दिया। हालांकि, राजेश एक्सपोर्ट्स किसी भी गलत काम से इनकार करता है और उसने सेबी के निष्कर्षों को अदालत में चुनौती दी है।
दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में ‘लाइव हिन्दुस्तान’ की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए ‘कुछ अलग’ और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें
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