एक नए शोध में कैंसर से जुड़े गट माइक्रोबायोम पैटर्न और कम फाइबर सेवन के बीच संबंध पाया गया है, जबकि अधिक फाइबर कोलोरेक्टल कैंसर के संकेतों को कम करता …और पढ़ें
सांकेतिक तस्वीर।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एक नए शोध में कैंसर से जुड़े गट माइक्रोबायोम पैटर्न और आहार में कम फाइबर लेने के बीच संबंध पाया गया है। साथ ही, फाइबर का अधिक सेवन करने से माइक्रोबायोम में कोलोरेक्टल कैंसर के संकेत कम पाए गए।
यह शोध सेल होस्ट एंड माइक्रोब जर्नल में छपी है। इसमें बताया गया है कि भोजन में खासकर फाइबर का सेवन आंतों में मौजूद बैक्टीरिया में बदलाव लाकर कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम, उसके बढ़ने या उससे बचाव में सहायक हो सकता है।
यूरोपियन मालिक्यूलर बायोलाजी लेबोरेटरी के शोधकर्ताओं ने 27 शोध के आंकड़ों का दोबारा विश्लेषण किया, जिसमें 6,779 उपलब्ध गट माइक्रोबायोम सीक्वेंसिंग प्रोफाइल शामिल थे। उन्होंने स्टूल-बेस्ड माइक्रोबायोम सिग्नल्स की तुलना सीधे ट्यूमर टिश्यू में पाए जाने वाले माइक्रोब्स से करने के लिए 906 इंटेस्टाइनल टिश्यू सैंपल्स का भी विश्लेषण किया।
टीम ने कोलोरेक्टल कैंसर से जुड़े माइक्रोबियल सिग्नेचर की पहचान की।शोधकर्ता जार्ज जीलर ने कहा, “हमने मल और टिश्यू की तुलना, खान-पान से जुड़ी जानकारी, बैक्टीरिया के प्रकारों (स्ट्रेन) तक का वर्गीकरण विश्लेषण और बीमारी फैलाने वाले कारकों के काम करने के तरीके का विश्लेषण किया। टिश्यू के नमूनों में, कैंसर से जुड़े माइक्रोब्स का पता शुरुआती स्टेज के ट्यूमर में ही चल गया था।
हालांकि, मल के नमूनों में शुरुआती स्टेज के कैंसर और कोलन के ऊपरी हिस्से में मौजूद ट्यूमर का पता लगाने की सटीकता थोड़ी कम थी। हमारी जानकारी के मुताबिक, यह अध्ययन अब तक का सबसे बड़ा ‘सिंगल-डिजीज माइक्रोबायोम मेटा-एनालिसिस’ है। इसमें 34 अध्ययन समूह से लिए गए नमूने शामिल हैं।