CGHS लाभार्थियों को बड़ी राहत, अब एचओडी दे सकेंगे मेडिकल क्लेम और इलाज की मंजूरी – Jagran

केंद्र सरकार ने CGHS लाभार्थियों के महंगे मेडिकल बिलों की मंजूरी के लिए स्थानीय अधिकारियों की शक्ति बढ़ा दी है। अब कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को इलाज …और पढ़ें
जेपी नड्डा और पीएम नरेंद्र मोदी (File Photo)
स्थानीय CGHS अधिकारियों की वित्तीय शक्तियां दोगुनी से अधिक बढ़ीं।
महंगे मेडिकल बिलों और इलाज की मंजूरी अब होगी तेज।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार के हेल्थ स्कीम (CGHS) का फायदा उठाने वाले लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। इसके तहत अब महंगे इलाज, सर्जरी और मेडिकल बिलों के पास होने के लिए उन्हें लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने CGHS के स्थानीय अधिकारियों की पैसों को मंजूरी देने की ताकत को दोगुने से भी ज्यादा बढ़ा दिया है। इस नए फैसले से अब ज्यादातर बिल और इलाज की मंजूरियां दिल्ली या बड़े मुख्यालयों में भेजने के बजाय स्थानीय शहरों के अधिकारी ही फटाफट दे सकेंगे।
बता दें कि महंगे इलाज और अस्पताल के बिलों को पास करने की सीमा में बड़ा बदलाव किया गया है। इसके तहत शहर या जोन प्रमुख के एडिशनल डायरेक्टर जैसे अधिकारी 15 लाख रुपये तक के मेडिकल क्लेम को सीधे मंजूरी दे सकते हैं। पहले यह सीमा सिर्फ 7 लाख रुपये थी।
CGHS के डायरेक्टर अब 25 लाख रुपये तक के क्लेम पास कर सकेंगे। इसके अलावा अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक अब 50 लाख रुपये तक के बड़े मेडिकल बिलों को मंजूरी दे सकते हैं। पहले यह सीमा 25 लाख थी।
अब सिर्फ 50 लाख रुपये से ऊपर के बेहद महंगे मामलों को ही स्वास्थ्य मंत्रालय और फाइनेंस डिवीजन के पास भेजा जाएगा। इसके अलावा केंद्र के इस फैसले में बिना तय रेट वाले इलाज और इमरजेंसी में भी बड़ी राहत दी गई है।
इस बात को ऐसे समझिए कि कई बार कुछ ऐसे नए इलाज या इम्प्लांट (जैसे पेसमेकर या घुटने का ऑपरेशन) होते हैं, जिनका रेट CGHS की लिस्ट में तय नहीं होता। ऐसे मामलों में भी एडिशनल डायरेक्टर अब 2 लाख रुपये, डायरेक्टर 5 लाख रुपये और महानिदेशक 10 लाख रुपये तक की मंजूरी तुरंत दे सकते हैं।
इसके साथ ही अगर किसी मरीज ने मजबूरी या इमरजेंसी में ऐसे अस्पताल में इलाज करा लिया जो CGHS के पैनल में नहीं है, और पहले से अनुमति भी नहीं ली थी, तो भी एडिशनल डायरेक्टर नियमों के तहत बाद में उस बिल को पास कर सकते हैं।
हालांकि गौर करने वाली बात यह है कि अधिकारियों की पावर जरूर बढ़ी है ताकि कागजी कार्रवाई में समय न खराब हो, लेकिन इलाज के नियम पहले जैसे ही रहेंगे। बिलों का भुगतान CGHS के तय रेट और जरूरत के हिसाब से ही किया जाएगा।
गौरतलब है कि इसके अलावा देश के नागरिकों को एक और बड़ी राहत दी गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी. नड्डा ने ‘आरोग्य सेतु 2.0’ एप लॉन्च कर दिया है। अब देश के नागरिकों को अलग-अलग काम के लिए अलग-अलग ऐप डाउनलोड नहीं करने पड़ेंगे।
इस सिंगल ऐप से आप अपने मेडिकल रिकॉर्ड को सुरक्षित रख और शेयर कर सकेंगे। सरकारी अस्पतालों में ओपीडी (OPD) के लिए ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक कर सकेंगे। अपने आस-पास के अस्पताल ढूंढ सकेंगे और जरूरत पड़ने पर एम्बुलेंस बुला सकेंगे और आयुष्मान भारत योजना से जुड़ी सभी सुविधाओं का लाभ भी इसी ऐप के जरिए ले सकेंगे।

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