डॉक्टरों ने बताई थी सिर्फ 10 दिन जिंदगी, ऑटोइम्यून रोग से जूझ रही अमृतपाल कौर 11 साल से रोज सुबह 4 बजे गुरु… – Dainik Bhaskar

भास्कर न्यूज |लुधियाना
कहते हैं, जहां दुनिया की तमाम दवाइयां और डॉक्टर घुटने टेक देते हैं, वहां से आस्था, अटूट विश्वास और भक्ति की शक्ति का चमत्कार शुरू होता है। ऐसी ही एक जीती-जागती और रूह को झकझोर देने वाली कहानी है लुधियाना की रहने वाली अमृतपाल कौर की। एक समय था जब डॉक्टरों ने उन्हें एक गंभीर ऑटोइम्यून बीमारी के चलते जवाब दे दिया था कि वे इस संसार में 10 दिन से ज्यादा जीवित नहीं रह सकतीं। लेकिन धन-धन शहीद बाबा दीप सिंह जी के चरणों की सेवा और अरदास ने उन्हें न सिर्फ नया जीवन दिया, बल्कि पिछले 11 सालों से वे बिना एक भी दिन छुट्टी किए, रोजाना सुबह 4 बजे उठकर गुरुद्वारा साहिब का मुख्य हुकमनामा (मुखवाक) लिखने की सेवा निभा रही हैं।
अमृतपाल कौर बताती हैं कि बीमारी के दिनों में जब उन्हें तेज बुखार होता था और चेहरा काला पड़ जाता था, तब भी वे बुरका (चेहरा ढककर) डालकर गुरुद्वारा साहिब पहुंच जाती थीं। संगत उन्हें आराम करने को कहती, तो वे कहती थीं इस दर पर जब कोई दुखी इंसान आता है और सजाकर लिखे हुए गुरु के शबद पढ़ता है, तो उसे जो सुकून मिलता है, वही सुकून मुझे नया जीवन देता है। अमृतपाल की यह कहानी साबित करती है कि अगर हौसला बुलंद हो और गुरु पर अटूट विश्वास हो, तो मौत को भी मात दी जा सकती है। उन्होंने कहा, आज गुरु हरगोबिंद साहिब जी का प्रकाश पर्व है आज के हुक्मनामे में अपनी और कला के रंग भर देगी ।
पिछले दो महीनों से अमृतपाल कौर की मां गंभीर हालत में भर्ती थीं। लेकिन वहां से भी रोज सुबह समय पर गुरुद्वारा साहिब पहुंचकर हुकमनामा लिखना नहीं भूलती थीं। बीते कल उनकी माता जी का देहांत हो गया, इस गहरे सदमे और दुख के बावजूद आज सुबह अमृतपाल अपने आंसुओं को पोंछकर समय पर गुरुद्वारा साहिब पहुंचीं और हमेशा की तरह गुरु का हुकमनामा लिखा।
उन्होंने कहा, जब तक बाबा जी ने सांसें बख्शी हैं, यह कदम आंधी-तूफान में भी नहीं रुकेंगे।अमृतपाल कौर को बचपन से ही पेंटिंग का बेहद शौक है 11 साल पहले जब वे पहली बार अमृत वेले गुरुद्वारा साहिब आईं, तो उन्होंने तत्कालीन हेड ग्रंथी भगवान सिंह जी से पूछा कि गुरु का हुकमनामा बोर्ड पर इतना सिंपल क्यों लिखा जाता है इस पर हेड ग्रंथी ने मुस्कुराकर कहा, “क्या तुम यह सेवा करोगी अमृतपाल ने उसी दिन चार अलग-अलग रंगों के चॉक से बेहद खूबसूरत लिखावट में हुकमनामा लिखा। तब से लेकर आज तक वे रोजाना 12 रंगों के चॉक का इस्तेमाल कर गुरबाणी को बोर्ड पर इतनी खूबसूरती से उकेरती हैं कि देखने वाले मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।
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