Space News in Hindi: दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पिछले कुछ दशकों में ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिसने वैज्ञानिक को भी चौंका दिया. आज तक विज्ञान के पास भी इन सवालों का सटीक जवाब नहीं है. एक ऐसी ही घटना आज से करीब 118 साल पहले साइबेरिया में घटी, जिसे दुनिया के सबसे बड़े रहस्यों में से एक माना जाता है. रिपोर्ट बताती है 30 जून, 1908 को सुबह करीब सवा सात बजे आसमान से जमीन पर आ रहा एक पिंड हवा में ही फट गया. इस धमाके से ऐसा असर हुआ कि करीब 2000 वर्ग KM से ज्यादा इलाके में फैला घना जंगल मिनटों में तबाह हो गया. दुनिया आज इस धमाके को तुंगुस्का विस्फोट के नाम से जानती है. दशकों पहले की इस घटना में लाखों पेड़ जड़ से उखड़ गए और कई किलोमीटर दूर तक लोगों ने झटके महसूस किए थे.
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मगर इस घटना में एक चीज ने सबसे ज्यादा हैरान किया. इतनी तबाही के बाद भी जमीन में कोई बड़ा गड्डा नहीं हुआ और ना ही कोई क्रेटर मिला. वैज्ञानिकों तब सबसे ज्यादा हैरानी हुई जब प्रभावित जगह पर वैज्ञानिकों को उल्कापिंड या पत्थर का टुकड़ा तक नहीं मिला. यही वजह है कि ये घटना लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली बनी रही. हालांकि बाद में शोध में माना गया कि किसी एस्टेरॉइड या धूमकेतु के हवा में ही फटने यानी एयरबर्स्ट का मामला हो सकता है. अब 118 साल बाद फिर वैज्ञानिक इस घटना को लेकर चेतावनी दे रहे हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतरिक्ष से आने वाले छोटे या थोड़े बड़े आकार के पिंड अक्सर पृथ्वी के वायुमंडल में ही टूट जाते हैं. लेकिन अगर कोई बड़ा पिंड सीधे किसी आबादी वाले क्षेत्र के ऊपर फट जाए तो इसका असर बहुत विनाशकारी हो सकता है.
वैज्ञानिक ये भी मान रहे हैं कि ऐसे खतरों को समय रहते पहचानना हमेशा आसान नहीं होता. खासकर जब कोई पिंड सूरज की दिशा से पृथ्वी की तरफ आता है, तो उसे टेलीस्कोप से देख पाना मुश्किल हो जाता है. इसी कारण कई बार चेतावनी मिलने का समय बहुत कम या लगभग ना के बराबर रह जाता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज भी तुंगुस्का जैसी घटना की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. हालांकि तकनीक पहले से काफी बेहतर हो चुकी है और नासा जैसी अंतरिक्ष एजेंसियां पृथ्वी के पास आने वाले एस्टेरॉइड्स पर लगातार नजर रखती हैं. इसके लिए नए मिशन और स्पेस टेलीस्कोप भी बनाए जा रहे हैं ताकि संभावित खतरों को पहले ही पहचाना जा सके.
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